नई दिल्ली। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बिहार में चल रही स्पेशल समरी रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर मतदाता और राजनीतिक दल को समान अधिकार देता है। यदि समय रहते मतदाता सूची में त्रुटियों को साझा नहीं किया जाता या उम्मीदवार द्वारा अपने मत का चयन करने के 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर नहीं की जाती, और उसके बाद “वोट चोरी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर जनता को गुमराह किया जाता है, तो यह संविधान का अपमान है।
राजनीतिक दलों की भूमिका पर चिंता
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों और उनके द्वारा नामित बूथ लेवल एजेंट (BLA) के सत्यापित दस्तावेज और टेस्टिमोनियल या तो राज्य और राष्ट्रीय नेताओं तक नहीं पहुँच रहे हैं, या उन्हें नजरअंदाज कर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।
पारदर्शिता और जनता का भरोसा
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग के दरवाजे सभी के लिए हमेशा खुले हैं। जमीनी स्तर पर मतदाता, राजनीतिक दल और बूथ लेवल अधिकारी (BLO) पूरी पारदर्शिता से काम कर रहे हैं। वे सत्यापन कर रहे हैं, हस्ताक्षर कर रहे हैं और वीडियो टेस्टिमोनियल भी दे रहे हैं। यह सबूत इस बात का प्रमाण है कि बिहार में SIR प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से चल रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा:
- “कानून के अनुसार अगर समय रहते मतदाता सूचियों में त्रुटियां साझा न की जाएँ, अगर मतदाता द्वारा अपने उम्मीदवार को चुनने के 45 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर नहीं की जाए, और फिर वोट चोरी जैसे गलत शब्दों का इस्तेमाल करके जनता को गुमराह किया जाए, तो यह भारत के संविधान का अपमान नहीं तो और क्या है?”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि सभी हितधारक मिलकर बिहार के SIR को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राहुल गांधी का आरोप
इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा कि गरीब की असली ताक़त उसका वोट है। उन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के जरिए वोट चोरी की साज़िश की जा रही है और वादा किया कि वे हर कीमत पर जनता की ताक़त की रक्षा करेंगे।













