दुर्ग : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जनता की सुविधा के लिए शुरू की गई सिटी बस सेवा अब भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण बन गई है। करोड़ों रुपए की लागत से खरीदी गई बसें अब डिपो में खड़ी हैं और कबाड़ बन चुकी हैं। संचालन में हुई चूक और रखरखाव में लापरवाही के कारण बसों की हालत इतनी बिगड़ गई कि अब इन्हें न्यूनतम मूल्य पर नीलाम किया जा रहा है।
20 करोड़ की बसें अब जर्जर
भिलाई नगर पालिका निगम ने साल 2018 में करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से 69 बसें खरीदी थीं। लेकिन समय पर रखरखाव न होने और संचालन एजेंसी की ब्लैकलिस्टिंग के कारण बसें जर्जर हो गईं। डिपो में खड़ी लगभग 60 प्रतिशत बस पार्ट्स चोरी हो चुके हैं। न सुरक्षा व्यवस्था, न समय पर जांच और न ही चोरी रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया।
Read More : रायपुर: रेल यात्रियों की बढ़ेंगी मुश्किलें, कई MEMU और पैसेंजर ट्रेनें रद्द
तीसरी बार नीलामी की कोशिश
चोरी की शिकायत थाने में लंबित है, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं की गई। अब इन 69 बसों को मेटल स्क्रैप ट्रेड कारपोरेशन लिमिटेड (MSTC) के माध्यम से नीलाम किया जा रहा है। यह तीसरी बार नीलामी की कोशिश है क्योंकि पहले दो बार बोली असंतोषजनक रही। इस बार न्यूनतम मूल्य 2.75 करोड़ रुपए तय किया गया है और केवल MSTC पोर्टल पर पंजीकृत बिडर ही भाग ले सकेंगे। निगम आयुक्त राजीव पांडे के अनुसार यह कार्रवाई जिला कलेक्टर के आदेश पर की जा रही है।
अगला कदम क्या होगा?
अब यह देखना होगा कि इस बार नीलामी पूरी होती है या फिर चौथी बार प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी। करोड़ों की जनता सुविधा वाली बस सेवा अब कबाड़ और भ्रष्टाचार की कहानी बन चुकी है, जिससे प्रशासन और निगम पर सवाल उठ रहे हैं।









