Chhattisgarh Electricity Tariff Hike रायपुर: छत्तीसगढ़ में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए घोषित नई बिजली दरों को लेकर सियासत पूरी तरह गरमा गई है। राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को राजधानी रायपुर, बिलासपुर, कोंडागांव और महासमुंद सहित प्रदेश के कई हिस्सों में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बिजली दफ्तरों का घेराव कर उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई, नगाड़े बजाए गए और मुख्यमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला भी फूंका गया।
Chhattisgarh Electricity Tariff Hike कांग्रेस ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार को ‘उद्योगपतियों की सरकार’ करार दिया है और आरोप लगाया है कि आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालकर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। राजधानी रायपुर के डंगनिया स्थित विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य कार्यालय के बाहर कांग्रेस ने एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया।
Chhattisgarh Electricity Tariff Hike रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने दफ्तर के बाहर नगाड़ा बजाकर सोई हुई सरकार को जगाने का प्रतीकात्मक प्रयास किया। रायपुर शहर जिलाध्यक्ष कुमार मेनन ने सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “प्रदेश में ढाई साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। साल 2028 के चुनाव से ठीक पहले सरकार को महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं के खातों में एकमुश्त 10 हजार रुपये डालने हैं। इस भारी-भरकम राशि के इंतजाम के लिए सरकार अभी से बिजली दरों में बढ़ोतरी करके आम जनता को लूटने का काम कर रही है। ढाई साल तक जनता की गाढ़ी कमाई वसूली जाएगी और अंत में चुनावी लाभ के लिए वही पैसा खातों में डाल दिया जाएगा।”
Chhattisgarh Electricity Tariff Hike: पूर्व विधायक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विकास उपाध्याय ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बढ़ोतरी के पीछे एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी और बड़ी प्लानिंग है। उपाध्याय ने कहा, “जनता को बिना बताए चुपके से बिजली दरें इसलिए बढ़ाई जा रही हैं क्योंकि सरकार को अडानी के स्मार्ट मीटर और सोलर पैनल बाजार में स्थापित करने हैं। चुनाव से पहले भाजपा ने जनता से सस्ती बिजली के लोकलुभावन वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आते ही दरों में भारी वृद्धि कर आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया गया है।”
न्यायधानी बिलासपुर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्थानीय बिजली कार्यालय का घेराव किया और मुख्य गेट पर चढ़कर नारेबाजी की। बिलासपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले कोटा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा, “भाजपा की यह सरकार पूरी तरह से उद्योगपतियों के इशारों पर चल रही है। बड़े-बड़े उद्योगपतियों और कॉरपोरेट घरानों को सरकार की तरफ से भारी सब्सिडी और टैक्स में छूट दी जा रही है, जबकि इसकी भरपाई के लिए आम जनता, मध्यम वर्ग और गरीब उपभोक्ताओं को लूटा जा रहा है।” विधायक श्रीवास्तव ने चेतावनी दी कि कांग्रेस इस जनविरोधी फैसले को बर्दाश्त नहीं करेगी और आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को पूरी प्राथमिकता के साथ सदन के भीतर उठाया जाएगा।
कोंडागांव में पुलिस से तीखी धक्का-मुक्की, महासमुंद में भी प्रदर्शन
बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले में कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे ज्यादा आक्रामक रहा। यहां बिजली दफ्तर का घेराव करने पहुंचे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए थे। कोंडागांव जिलाध्यक्ष रवि घोष के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बिजली की बढ़ी दरों के साथ-साथ क्षेत्र में फ्यूल (ईंधन) और खाद की भारी किल्लत को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की और झड़प हुई। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पुलिस के घेरे को तोड़ते हुए मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया। इसी क्रम में महासमुंद जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी विद्युत वितरण कंपनी के कार्यालय के सामने धरना दिया और घेराव कर कलेक्टर व विभागीय अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नए टैरिफ प्लान को अपनी मंजूरी दे दी है। हालांकि, बिजली कंपनियों ने घाटे का हवाला देते हुए लगभग 24 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव आयोग के सामने रखा था, जिसे आयोग ने पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने व्यापक जनहित का दावा करते हुए औसतन केवल 6.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी को ही हरी झंडी दिखाई है।
नियामक आयोग का तर्क: 70 से 75% उपभोक्ताओं पर असर नहीं
चारों तरफ हो रहे विरोध और कांग्रेस के आरोपों के बीच छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने अपना पक्ष सामने रखा है। आयोग के सचिव सूर्य प्रकाश शुक्ला ने दावा किया है कि इस बढ़ोतरी का आम और गरीब उपभोक्ताओं पर बहुत सीमित असर पड़ेगा। आयोग के अनुसार, प्रदेश में लागू ‘बिजली बिल हाफ योजना’ में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 400 यूनिट तक मासिक खपत वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली 200 यूनिट तक की छूट पहले की तरह ही जारी रहेगी। चूंकि छत्तीसगढ़ के लगभग 70 से 75 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता इसी श्रेणी (400 यूनिट से कम खपत) के अंतर्गत आते हैं, इसलिए उन पर नई दरों का वित्तीय प्रभाव न के बराबर या बेहद कम पड़ेगा।
आयोग ने बिजली कंपनी के आय-व्यय का ब्यौरा देते हुए इस बढ़ोतरी को जायज ठहराया है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में बिजली वितरण कंपनी को एक यूनिट बिजली खरीदकर उपभोक्ताओं के घरों तक सुरक्षित पहुंचाने में औसतन 7.13 रुपये का खर्च आ रहा है। इसके मुकाबले, मौजूदा टैरिफ दरों के आधार पर कंपनी को प्रति यूनिट केवल 6.71 रुपये की आय हो रही थी। यानी कंपनी प्रति यूनिट 42 पैसे के शुद्ध घाटे में चल रही थी, जिसे पाटने के लिए औसतन 40 से 42 पैसे प्रति यूनिट की यह आंशिक वृद्धि की गई है।
यह नई दरें आगामी 1 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएंगी। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने इस बढ़ोतरी को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में ब्लॉक और बूथ स्तर पर चक्काजाम और जेल भरो जैसे बड़े आंदोलन किए जाएंगे।









