4 साल बाद फिर टूटी शिवसेना! लोकसभा में घटा उद्धव गुट का कुनबा, अब सिर्फ 3 सांसदों का सहारा

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Shiv Sena UBT Split: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिला है। शिवसेना UBT में बड़ी टूट की चर्चाओं के बीच अब बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र देकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की इच्छा जताई है। इस कदम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।

पिछले एक सप्ताह से महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा तेज थी। अब शिवसेना UBT में बड़ी टूट ने इन चर्चाओं को और मजबूत कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में इसे उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में उनकी पार्टी दूसरी बार बड़े विभाजन का सामना कर रही है।इस घटनाक्रम ने सिर्फ शिवसेना की अंदरूनी राजनीति ही नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित किया है।

इन 6 सांसदों ने बदला अपना राजनीतिक रास्ता
इस शिवसेना UBT में बड़ी टूट में जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं उनमें संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल शामिल हैं।इन सांसदों के अलग होने के बाद लोकसभा में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना UBT गुट के पास केवल 3 सांसद बचे हैं। इससे पार्टी की संसदीय ताकत पर सीधा असर पड़ने वाला है।
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सांसदों को रोकने की कोशिश में जुटा उद्धव खेमा
शिवसेना UBT में बड़ी टूट को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे और उनके करीबी नेता लगातार सांसदों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। पार्टी नेतृत्व की ओर से सांसदों की बैठक भी बुलाई गई थी, ताकि नाराज नेताओं को मनाया जा सके।हालांकि तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पार्टी की कोशिशें सफल होती नजर नहीं आईं। अब उद्धव ठाकरे के सामने संगठन को दोबारा मजबूत करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

संजय राउत का दावा और बढ़ी सियासी चर्चा
इस पूरे मामले पर शिवसेना UBT नेता संजय राउत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सांसदों ने पहले पार्टी और उद्धव ठाकरे के साथ रहने का भरोसा दिलाया था। उन्होंने दावा किया कि कई सांसदों ने अपने परिवार और धार्मिक आस्था की शपथ लेकर पार्टी नहीं छोड़ने की बात कही थी।लेकिन इसके बाद हुए इस फैसले ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को हैरान कर दिया है।

2022 की बगावत की याद फिर हुई ताजा
शिवसेना UBT में बड़ी टूट ने जून 2022 की उस बड़ी बगावत की याद फिर ताजा कर दी, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायक उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर अलग हो गए थे।उस बगावत के कारण महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी और बाद में चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और धनुष-बाण चुनाव चिन्ह आवंटित किया था।

उद्धव ठाकरे के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती क्या?
लगातार दूसरी बार हुई इस राजनीतिक टूट ने उद्धव ठाकरे की नेतृत्व क्षमता और पार्टी के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिवसेना UBT में बड़ी टूट के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती बचे हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की होगी।वहीं दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे का राजनीतिक कद और मजबूत होता नजर आ रहा है। आने वाले समय में इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति और आगामी चुनावी रणनीतियों में साफ दिखाई दे सकता है।

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