IPS Ankita Sharma Success Story: छत्तीसगढ़ की अंकिता शर्मा की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो किसी बड़े लक्ष्य के सामने शुरुआती असफलताओं से घबरा जाते हैं। दुर्ग जिले से ताल्लुक रखने वाली अंकिता ने सिविल सेवा में जाने के अपने सपने के लिए MBA की पढ़ाई तक बीच में छोड़ दी। UPSC के शुरुआती दो प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया 203वीं रैंक हासिल कर IPS अधिकारी बनने का रास्ता तय किया।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाली अंकिता ने 10वीं में 92 प्रतिशत और 12वीं में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने MBA में दाखिला लिया, लेकिन सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाकर पढ़ाई छोड़ दी और UPSC की तैयारी में जुट गईं। दिल्ली में तैयारी करने के बाद उन्होंने घर लौटकर भी अपनी तैयारी जारी रखी और अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए परीक्षा की तैयारी की।
पहले दो प्रयासों में मिली असफलता
UPSC के पहले प्रयास में अंकिता शर्मा मुख्य परीक्षा में महज 15 अंकों के अंतर से चयन से रह गई थीं। दूसरे प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा भी पार नहीं कर पाईं। लगातार दो असफलताओं के बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। अपनी कमियों को पहचाना और तीसरे प्रयास में नए तरीके से परीक्षा दी।
2018 में हासिल की 203वीं रैंक
तीसरे प्रयास में अंकिता शर्मा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 203वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की। इसके बाद वह IPS अधिकारी बनीं। उनकी सफलता को छत्तीसगढ़ में महिला अभ्यर्थियों और सिविल सेवा की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि के तौर पर देखा गया।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निभाई जिम्मेदारी
IPS बनने के बाद अंकिता शर्मा ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी जिम्मेदारियां संभालीं। उनके काम और अभियानों के कारण उन्हें सार्वजनिक तौर पर ‘लेडी सिंघम’ नाम से भी पहचान मिली। उनकी यात्रा में सरकारी स्कूल से पढ़ाई, MBA छोड़कर UPSC की तैयारी और दो असफलताओं के बाद तीसरे प्रयास में सफलता जैसे पड़ाव शामिल रहे।






