हेमंत वर्मा /राजनांदगांव। भाजपा नेत्री और पूर्व अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण सदस्य रत्नावली कौशल ने कहा है कि बस्तर अब लाल आतंक और नक्सलवाद की छाया से बाहर निकलकर विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की नई उद्योग नीति को क्षेत्र के लिए वरदान करार दिया।
रत्नावली कौशल ने बस्तर कनेक्ट कार्यक्रम में कहा कि जिस क्षेत्र को पहले अति पिछड़ा और नक्सल समस्या से ग्रसित माना जाता था, आज वही बस्तर विकास की राह पर तेजी से अग्रसर है। बिजली, पेयजल, सड़क, शिक्षा, चिकित्सा और खेल गतिविधियों में बस्तर अब राज्य के अन्य प्रगतिशील क्षेत्रों के समकक्ष पहुँच गया है।
उन्होंने बताया कि बस्तर के विकास को गति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 5,200 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें 3,513.11 करोड़ की रावघाट-जगदलपुर नई रेल लाइन और कोत्तवलसा-किरंदुल रेल लाइन का दोहरीकरण शामिल है। इसके अलावा, बस्तर में 2,300 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाएं भी स्वीकृत की गई हैं। ये परियोजनाएं यात्रा, व्यापार, पर्यटन और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सुनिश्चित करेंगी।
बस्तर में बड़े निवेश और स्वास्थ्य सुविधाएं
कौशल ने बताया कि बस्तर में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम द्वारा विशाल इस्पात संयंत्र स्थापित किया गया है। इसके अतिरिक्त, 43,000 करोड़ रुपये का निवेश और 200 करोड़ रुपये का सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल परियोजना बस्तर की आधारभूत संरचना को मजबूत करेगी। लगभग 1,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश भी सेवा क्षेत्र और एमएसएमई में हो रहा है।
बस्तर में 350 बेड का मल्टी-स्पेशियलिटी निजी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जा रहा है, जबकि जगदलपुर में 33 करोड़ रुपये का मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल और नवभारत इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज द्वारा 85 करोड़ रुपये का 200 बेड का सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल भी तैयार किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलेगा।
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कृषि और उद्योग में निवेश
कौशल ने कहा कि बस्तर के बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर और कोंडागांव में आधुनिक राइस मिल और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की जा रही हैं, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उदाहरण के तौर पर, नारायणपुर जिले में पार्श्वा एग्रीटेक प्रतिवर्ष 2,400 टन परबॉयल्ड चावल का उत्पादन करेगी।
स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, पर्यटन, निर्माण और शिक्षा क्षेत्रों में यह निवेश बस्तर के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।
आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए नई राह
कौशल ने बताया कि नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति लागू की गई है। इसमें तीन वर्षों तक 10,000 रुपये मासिक सहायता, शहरी क्षेत्रों में 4 डिसमिल प्लॉट या ग्रामीण क्षेत्रों में 1 हेक्टेयर जमीन, व्यावसायिक प्रशिक्षण, पूर्ण इनामी राशि, सामूहिक आत्मसमर्पण पर दुगुना इनाम और नक्सल-मुक्त गांवों के लिए 1 करोड़ रुपये तक की विकास योजनाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आत्मसमर्पित नक्सली परिवारों को 15,000 आवास मंजूर किए गए हैं।
आदिवासियों के लाभ के लिए अन्य पहलें
राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता खरीदी दर को 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा किया है। इससे बस्तर के 52 लाख संग्राहक सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।
रत्नावली कौशल ने कहा कि बस्तर अब संघर्ष की भूमि से संपर्क, समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री साय के सुशासन और मोदी सरकार की परियोजनाओं ने बस्तर में निवेश, रोजगार और आधारभूत संरचना का नया दौर शुरू कर दिया है।











