Blast Zone Movie Review: पारिवारिक संघर्ष और थ्रिलर का बेहतरीन कॉकटेल है ब्लास्ट ज़ोन, जरूर देखें यह धमाकेदार फिल्म

VIKASH KHALKHO
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Blast Zone Movie Review: नई दिल्ली। एजीएस एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी और नवोदित निर्देशक सुभाष के. राज द्वारा निर्देशित एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘ब्लास्ट ज़ोन’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। तमिल में ‘ब्लास्ट’ और तेलुगु में ‘ब्लास्ट ज़ोन’ के नाम से रिलीज हुई यह फिल्म अपने टीज़र और ट्रेलर के समय से ही दर्शकों के बीच काफी कौतूहल पैदा कर रही थी। लव टुडे और ड्रैगन जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले प्रोडक्शन हाउस ने इस बार एक संजीदा और एक्शन से भरपूर विषय को चुना है। फिल्म में मुख्य रूप से ‘एक्शन किंग’ अर्जुन, अभिरामी, प्रीति मुखुंदन और विवेक प्रसन्ना मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि संगीत केजीएफ फेम रवि बसूर ने दिया है। यह फिल्म एक साधारण कहानी पर आधारित होने के बावजूद अपने कसी हुई पटकथा (स्क्रीनप्ले) के दम पर दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब होती है।

पारिवारिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण की अनूठी कहानी फिल्म की कहानी राजाराम (अर्जुन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक कराटे स्कूल और फार्मेसी चलाता है। वह अपनी पत्नी (अभिरामी), बेटी और भाई के साथ एक बेहद शांत और सरल जीवन व्यतीत कर रहा है। वह अपनी बेटी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कराटे सिखाता है और उसे जरूरतमंदों की मदद करने के संस्कार देता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब राजाराम का पूरा परिवार एक शक्तिशाली माइनिंग किंगपिन वरुण दयालन (जॉन कोक्रेन) के खिलाफ खड़ा हो जाता है। आम तौर पर फिल्मों में नायक अकेले अपने परिवार को बचाता है, लेकिन यहाँ परिवार के चारों सदस्य समान रूप से मजबूत हैं और खलनायक से लोहा लेते हैं। निर्देशक ने बिना किसी उपदेशात्मक टोन के कहानी में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को बेहद खूबसूरती से पिरोया है।

एक्टिंग और तकनीकी पक्ष में दिखा दम अभिनय के मामले में अर्जुन अपने कराटे मास्टर के किरदार में पूरी तरह फिट बैठे हैं और उन्होंने बेहतरीन शारीरिक कौशल का प्रदर्शन किया है। वहीं, अभिरामी और प्रीति मुखुंदन ने भी एक्शन दृश्यों में अपनी कड़ी मेहनत की छाप छोड़ी है। मध्यांतर (प्री-इंटरवल) से ठीक 15 मिनट पहले का घटनाक्रम और दूसरे हाफ में चौथे पारिवारिक सदस्य से जुड़ा सस्पेंस फिल्म का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है, जो सिनेमाघरों में दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर देता है। तकनीकी तौर पर रवि बसूर का बैकग्राउंड स्कोर पहले हाफ में काफी प्रभावी है, हालांकि दूसरे हाफ में यह थोड़ा कमजोर पड़ता है। अरुण राधाकृष्णन की सिनेमैटोग्राफी बजट की सीमाओं के भीतर काफी सटीक है।

कमजोर कड़ियां और अंतिम निष्कर्ष सकारात्मक पहलुओं के बावजूद फिल्म में कुछ खामियां भी नजर आती हैं। स्क्रीनप्ले को दिलचस्प बनाने के चक्कर में निर्देशक ने मुख्य किरदारों को इतना शक्तिशाली दिखा दिया है कि वे हर बड़े संकट से बिना किसी खरोंच के बाहर आ जाते हैं, जिससे कहानी कहीं-कहीं अवास्तविक लगने लगती है। इसके अलावा, फिल्म की लंबाई बढ़ाने वाले दो सबप्लॉट्स (कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न प्रकरण और इब्राहिम की बैकस्टोरी) को अगर एडिटर प्रदीप ई. राघव कैंची चलाकर हटा देते, तो फिल्म का प्रवाह और बेहतर हो सकता था। बहरहाल, कुछ तार्किक कमियों को छोड़ दिया जाए, तो ‘ब्लास्ट ज़ोन’ अपने बेहतरीन स्क्रीनप्ले, शानदार एक्शन कोरियोग्राफी और थ्रिलर एलिमेंट्स के कारण सिनेमाघरों में एक बार देखने लायक मनोरंजक फिल्म जरूर है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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