Tuesday, September 1, 2026
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CG Assembly: छत्तीसगढ़ में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक 2026’ पारित; ‘रिस्क और ट्रस्ट’ बेस्ड सिस्टम लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में उद्योग, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है. छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है. इस कानून के लागू होने के साथ ही छत्तीसगढ़ पूरे देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जोखिम आधारित (Risk-Based) एवं विश्वास आधारित (Trust-Based) बिजनेस परमिशन सिस्टम की शुरुआत की जाएगी.

अनावश्यक नियमों से मुक्ति और प्रक्रियाओं का सरलीकरण

इस ऐतिहासिक विधेयक का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में व्यापार और उद्योगों की स्थापना व उनके संचालन संबंधी शासकीय प्रक्रियाओं को बेहद सरल और पारदर्शी बनाना है. सरकार ने अनावश्यक अनुपालनों (Compliances) को कम करने पर विशेष जोर दिया है, जिससे विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए एक उद्यम-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण तैयार हो सके.

नई व्यवस्था के तहत उद्योगों को उनके आकार और गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग जोखिम श्रेणियों (Risk Categories) में बांटा जाएगा. कम जोखिम वाले छोटे एवं मध्यम कारोबारों को सरल व त्वरित मंजूरी मिलेगी, जिससे उन्हें बड़े उद्योगों जैसी जटिल और लंबी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा. हालांकि, अधिक जोखिम वाली बड़ी और संवेदनशील परियोजनाओं के लिए आवश्यक तकनीकी परीक्षण और समयबद्ध स्वीकृति की पुरानी व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी.

रिन्यूअल की अनिवार्यता खत्म, अब मिलेगा ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’

नई व्यवस्था के अंतर्गत अब कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षणों (Inspections) को बंद कर दिया जाएगा. इनके स्थान पर ‘सेल्फ सर्टिफिकेशन’ (स्व-घोषणा) अथवा लाइसेंसधारी इंजीनियर, आर्किटेक्ट या अन्य अधिकृत पेशेवरों द्वारा दिए गए प्रमाणन को ही मान्य किया जाएगा. इसके अलावा, उद्यमियों को हर साल लाइसेंस या अनुमतियों के नवीनीकरण (Renewal) की झंझट से भी पूरी तरह राहत दे दी गई है.

MSME इकाइयों के लिए विशेष रियायतें और ‘ऑटो अप्रूवल’

विधेयक में छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई खास प्रावधान किए गए हैं:

  • जल प्रदाय अनुमति: एमएसएमई इकाइयों को पानी के कनेक्शन और उपयोग की अनुमति अब केवल स्व-घोषणा के आधार पर मिल जाएगी.

  • भवन अनुज्ञा: बिल्डिंग परमिशन के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन या अधिकृत विशेषज्ञों का प्रमाण-पत्र ही काफी होगा.

  • सोसायटी व फर्म पंजीयन: फर्म और सोसायटियों का रजिस्ट्रेशन एक तय और समयबद्ध प्रक्रिया के तहत अनिवार्य रूप से किया जाएगा.

  • ऑटो अप्रूवल (स्वतः स्वीकृति): यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर संबंधित विभाग द्वारा आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो पात्र मामलों में अनुमति को स्वतः स्वीकृत (Auto Approved) मान लिया जाएगा.

8 विभागों की 43 सेवाएं शामिल, त्रिस्तरीय होगी निगरानी

इस नए कानून के दायरे में शुरुआत में राज्य शासन के 8 प्रमुख विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 महत्वपूर्ण सेवाओं को शामिल किया गया है. भविष्य में आवश्यकतानुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से अन्य अतिरिक्त सेवाएं भी इसमें जोड़ी जा सकेंगी.

त्रिस्तरीय निगरानी ढांचा:

कानून के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए राज्य में एक त्रिस्तरीय मजबूत व्यवस्था बनाई गई है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव (Chief Secretary) की अध्यक्षता में और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित विशेष समितियां इसकी कड़ाई से मॉनिटरिंग करेंगी। ये दोनों समितियां सीधे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च परिषद के मार्गदर्शन में काम करेंगी।

सरकार के इस बड़े आर्थिक सुधार से छत्तीसगढ़ के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सीधा और प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है. भरोसे और स्व-घोषणा पर आधारित यह अभूतपूर्व व्यवस्था सूबे में व्यापार करने की लागत (Cost of Doing Business) और समय दोनों को कम करेगी, जो छत्तीसगढ़ को देश के नक्शे पर एक प्रमुख इन्वेस्टमेंट हब के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी.

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