भारतमाला मुआवजा घोटाला : रायपुर। भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-विशाखापट्टनम इकॉनामिक कॉरिडोर में भू-अर्जन मुआवजा घोटाले की शिकायतों की जांच एक बार फिर सुर्खियों में है। सोमवार को रायपुर संभाग आयुक्त महादेव कावरे ने दावा-आपत्तियों पर लंबित रिपोर्टों की समीक्षा की। इस दौरान एक टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी, जबकि दो टीमें अब तक चुप्पी साधे बैठी हैं। समयसीमा निकल जाने पर संभागायुक्त ने कड़ी नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि शेष रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत की जाएं, ताकि किसानों को न्याय और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
भारतमाला मुआवजा घोटाला : दरअसल, प्रभावित किसानों से डेढ़ सौ से अधिक दावा-आपत्तियां दर्ज की गई थीं, जिनमें ज्यादातर ने जमीन के कम मुआवजे पर आपत्ति जताई है। जांच के लिए चार टीमों का गठन हुआ था और उन्हें तय समय में रिपोर्ट देने कहा गया था। पहले ही कई सप्ताह की देरी हो चुकी है, जिससे किसानों की पीड़ा और बढ़ गई है। संभागायुक्त ने स्पष्ट किया कि जिन किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला है, वे उनके न्यायालय में अभ्यावेदन दे सकते हैं, जबकि गड़बड़ियों पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर होगा।
मुआवजा विवाद में रिपोर्ट की सुस्ती अब प्रशासन के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। किसान जहां न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं रिपोर्टों में देरी से कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया अटक गई है।









