Barwani News:बड़वानी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर बड़वानी नगर के रानीपुरा स्थित एक निजी स्कूल परिसर में एक भव्य एवं महत्वपूर्ण जनगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख श्री अरुण जैन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला संघचालक श्री भगवान सेप्टा ने की। इस अवसर पर संघ के प्रांत एवं विभाग स्तर के पदाधिकारी, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि तथा नगर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
Barwani News:जनगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता अरुण जैन ने कहा कि संगठित हिंदू समाज ही भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की दिशा में अग्रसर कर सकता है। उन्होंने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने जिस उद्देश्य के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी, वह आज अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर है और समाज में व्यापक जागरण का कार्य कर रहा है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विश्व मंच पर भारत की महानता को स्थापित किया और देशवासियों को अपनी कमजोरियों का बोध कराया। वहीं भगिनी निवेदिता ने समाज के नियमित चिंतन और संगठन पर बल दिया, जिसे डॉ. हेडगेवार ने शाखा पद्धति के माध्यम से व्यवहारिक स्वरूप प्रदान किया।
अरुण जैन ने कहा कि भारत की पराधीनता का कारण केवल विदेशी आक्रमण नहीं था, बल्कि समाज की निष्क्रियता और बिखराव भी प्रमुख कारण रहे। उन्होंने इतिहास के उदाहरण देते हुए कहा कि जब समाज एकजुट नहीं रहा, तब-तब बाहरी शक्तियों ने भारत को कमजोर किया। उन्होंने पृथ्वीराज चौहान और जयचंद का उल्लेख करते हुए कहा कि आपसी असंगठन के कारण ही विदेशी आक्रमणकारी सफल हुए। इसी प्रकार छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा मिर्जा राजा जयसिंह को औरंगजेब का साथ छोड़कर हिंदू समाज के साथ खड़े होने का आग्रह भी असफल रहा, जिससे परिस्थितियां विपरीत बनीं।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने षड्यंत्रपूर्वक भारत की गौरवशाली छवि को विकृत किया और मैकाले की शिक्षा पद्धति के माध्यम से हमारी संस्कृति और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया। जबकि एक समय भारत में नालंदा जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय और प्रत्येक गांव में पाठशालाएं विद्यमान थीं।
अरुण जैन ने कहा कि हिंदू समाज को अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं करना होगा। यदि समाज केवल सरकार और सत्ता पर निर्भर रहेगा, तो वह सशक्त नहीं बन पाएगा। उन्होंने स्वतंत्रता काल में समाज की निष्क्रियता को देश विभाजन का कारण बताते हुए कहा कि जब-जब समाज जागृत हुआ है, तब-तब बड़े परिवर्तन हुए हैं। 1989 में राम मंदिर शिलान्यास और समाज की एकजुटता इसके उदाहरण हैं। उन्होंने सेतु समुद्रम प्रकरण का भी उल्लेख करते हुए कहा कि समाज की एकता के कारण गलत निर्णयों को वापस लेना पड़ा।
उन्होंने आह्वान किया कि समाज को अपयश, अपराध और बुराइयों से मुक्त होकर यशस्वी बनना होगा। संघ के शताब्दी वर्ष में चलाए जा रहे कार्यक्रमों—वृहद गृह संपर्क, हिंदू सम्मेलन आदि—के माध्यम से समाज को संगठित और सशक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने पंच परिवर्तन—समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वत्व जागरण और नागरिक कर्तव्य—को जीवन में अपनाने की अपील की। साथ ही स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने और मातृभाषा के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमुदाय से आह्वान किया गया कि वे स्वयं से बदलाव की शुरुआत करें और समाज के संगठन में सक्रिय भूमिका निभाएं। इस अवसर पर जिला संघचालक श्री भगवान सेप्टा, संघ के प्रांत एवं विभाग पदाधिकारी, नगर के प्रमुख जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं नागरिक उपस्थित रहे।











