Balod News :बालोद:- छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, ताकि छात्रों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की तैनाती सही तरीके से हो सके। लेकिन इस नेक पहल को भ्रष्ट अधिकारियों ने अपने गंदे धंधे का जरिया बना दिया। नियम-कानून ताक पर रखकर, खुल्लमखुल्ला पैसों की उगाही की जा रही है।
Balod News :जिन अधिकारियों ने मोटी रकम ऊपर तक पहुंचाई, वे सुरक्षित और संरक्षित हैं, जबकि जिनकी जेब हल्की रही, उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया गया। यह पूरी करतूत छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का नंगा नाच है।शिक्षा अधिकारी हिमांशु मिश्रा इसका सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरा है। इस दबंग अधिकारी ने नियमों को रौंदते हुए अपनी मनमानी को कानून बना लिया है।
Balod News :चाहे युक्तियुक्तकरण में फर्जीवाड़ा हो, लकवाग्रस्त शिक्षक को जबरन सक्रिय दिखाने की साजिश हो, या शिकायतों पर पर्दा डालने का खेल—हर जगह इसकी गंदी करतूतें साफ झलकती हैं। साक्ष्यों से लैस ग्यारह बिंदुओं में गंभीर आरोप दर्ज होने के बावजूद, संभागायुक्त तक हाथ बांधे बैठे हैं। यह साफ बताता है कि सत्ता और नेता दोनों ही इस गोरखधंधे में हिस्सेदार हैं। आखिर क्यों न हों? जब पेटी दर पेटी नोट पहुंच रहा है, तो ऐसे भ्रष्टाचारी को बचाना नेताओं का कर्तव्य बन जाता है।
Balod News :हिमांशु मिश्रा के विरुद्ध 11 ठोस शिकायतें
1. युक्तियुक्तकरण में मनमानी कर लाखों की वसूली।
2. नियम विरुद्ध शिक्षकों की पदस्थापना।
3. लकवाग्रस्त शिक्षक को फर्जी सक्रिय दिखाकर वेतन भुगतान।
4. अपात्र शिक्षकों को लाभ दिलाने के लिए नियम तोड़ना।
5. शिकायतों पर कार्रवाई रोकने हेतु रिश्वतखोरी।
6. शासन-प्रशासन के आदेशों की अवहेलना।
7. विभागीय कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए नेताओं से मिलीभगत।
8. दस्तावेज़ों में हेराफेरी और फर्जी प्रमाण पत्रों का उपयोग।
9. शिक्षकों से धन उगाही कर पदस्थापना तय करना।
10. आरटीआई से उजागर दस्तावेज़ों को दबाने का प्रयास।
11. जनहित से जुड़े मामलों में जानबूझकर देरी और ढिलाई।
संज्ञान पत्र
Balod News :शिक्षा विभाग का यह सड़ा हुआ तंत्र अब पूरी तरह से दलदल में बदल चुका है। जहां ईमानदारी का कोई मोल नहीं, जहां दस्तावेज़ और साक्ष्य महज़ कागज़ की रद्दी समझी जाती है। सूचना के अधिकार से निकाले गए प्रमाण भी अधिकारियों की आंखें खोलने के बजाय तिजोरियों को भरने का जरिया बन गए हैं।यह सब केवल शिक्षा को बर्बाद नहीं कर रहा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी लील रहा है।

Balod News :जब शिक्षक तैनाती भी पैसों के तराजू पर तौली जाएगी, तो शिक्षा का स्तर रसातल में ही जाएगा। ऐसे में जनता के पास एक ही विकल्प बचता है—सड़क पर उतरना। प्रशासन की बेशर्मी और नेताओं की सरपरस्ती ने हालात यहां तक ला दिए हैं कि अब आमरण अनशन और धरना प्रदर्शन जैसे कदम उठाने की नौबत आ गई है।शासन की चुप्पी और प्रशासन की गंदगी मिलकर छत्तीसगढ़ की शिक्षा को शर्मनाक दलदल में धकेल रही है। और इस गंदे खेल के सूत्रधार हैं वही लोग, जिन पर जिम्मेदारी थी कि वे शिक्षा को सशक्त बनाएं। मगर उन्होंने इसे अपने पेटी भरने का सबसे आसान धंधा बना लिया है।









