Archana Tiwari Case : इंदौर के दोस्त के साथ नेपाल में मिली, आखिर क्या कुछ हुआ था, पढ़े पूरी खबर…

Parivesh
Archana Tiwari Case

भोपाल, मध्यप्रदेश : चलती ट्रेन से रहस्यमयी तरीके से लापता हुई अर्चना तिवारी मामले से पर्दा उठ गया है। पुलिस ने खुलासा किया है कि यह कोई गुमशुदगी नहीं, बल्कि खुद अर्चना द्वारा रचा गया एक सुनियोजित ड्रामा था। पारिवारिक दबाव और जबरन शादी से बचने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया था।

रेलवे एसपी राहुल लोढ़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अर्चना को लखीमपुर (नेपाल बॉर्डर) से बरामद किया गया है। अर्चना एक छात्र नेता रही हैं और वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। परिवार की ओर से शादी का दबाव था, जिससे वह खुश नहीं थीं। इसी वजह से घर में अक्सर विवाद होते थे।

पूरे प्लान का मास्टरमाइंड कौन?

पुलिस के अनुसार, इस पूरे प्लान की मास्टरमाइंड खुद अर्चना थी। उनका परिचय इंदौर में ट्रेन यात्रा के दौरान सारांश नाम के एक युवक से हुआ था, जिसके साथ उनकी दोस्ती हुई। सारांश, जो एक ड्रोन कंपनी के लिए काम करता था, नेपाल में कुछ कनेक्शन रखता था।

यह प्लान 6 अगस्त को हरदा में एक ढाबे पर तैयार किया गया था। इस योजना में कैब ड्राइवर तेजिंदर का भी अहम रोल था। तेजिंदर ही वह शख्स था जिसने अर्चना को इटारसी में बिना सीसीटीवी वाले एरिया में ट्रेन से उतरने में मदद की। उसने अर्चना को ट्रेन में ही कपड़े भी बदलवाए ताकि कोई उन्हें पहचान न पाए।

कैसे हुआ खुलासा?

 

  • मोबाइल बंद करना: अर्चना ने अपना मोबाइल और घड़ी मिडघाट एरिया में बंद करके फेंक दिए थे ताकि लोकेशन ट्रेस न हो सके।
  • तेजिंदर की गिरफ्तारी: दिल्ली पुलिस ने एक चोरी के मामले में तेजिंदर को गिरफ्तार किया था। जीआरपी को उसी से अहम सुराग मिले।
  • सारांश से पूछताछ: तेजिंदर से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने सारांश को हिरासत में लिया। उससे पूछताछ में पूरा सच सामने आ गया।
  • टोल प्लाजा से बचकर यात्रा: अर्चना और सारांश ने टोल प्लाजा वाले रास्तों से परहेज किया ताकि उनकी पहचान न हो सके। वे पहले आंध्र प्रदेश गए और फिर नेपाल जाने का फैसला किया।
  • फर्जी सिम और नाम: अर्चना ने अपने पिता के नाम से एक नई सिम खरीदी और ‘सपना’ नाम से दूसरे शहरों में रही।

पुलिस ने कैसे ढूंढा?

पुलिस ने 400 से 500 सीसीटीवी फुटेज खंगाले और 60 से 70 लोगों की टीम ने लगातार काम किया। सारांश के कॉल और व्हाट्सएप कॉल की आईपी एड्रेस जांच करने के बाद पुलिस को उन पर शक हुआ। सारांश के नेपाल कनेक्शन से उन्हें पता चला कि वह काठमांडू जा सकते हैं। बाद में सारांश के माध्यम से ही अर्चना से संपर्क किया गया और उन्हें वापस लाया गया।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में अभी तक कोई आपराधिक धारा नहीं लगी है। अर्चना ने परिवार के दबाव और जबरन शादी से बचने के लिए यह कदम उठाया था। उनका मानना था कि गुमशुदगी का मामला इतना बड़ा नहीं होगा। फिलहाल, बयान दर्ज करने के बाद अर्चना को उनके परिवार को सौंपा जाएगा।

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