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वो कद्दावर मराठा नेता, जो महाराष्ट्र की सत्ता में हमेशा रहा ‘किंग मेकर’… अपने चाचा से भी कर दी थी बगावत, ऐसे थे अजित पवार

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निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : महाराष्ट्र की राजनीति का कद्दावर स्तंभ आज ढह गया। राज्य के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (अजीत गुट) प्रमुख अजित पवार का निजी विमान बारामती एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पाँच लोगों ने अपनी जान गंवाई, जिसमें दो पायलट और दो अन्य यात्री शामिल थे।

शुरुआती जीवन और ग्रामीण परिवेश

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर के देवलाली प्रवरा गांव में हुआ। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े अजित ने किसानों की समस्याओं को करीब से देखा। पिता के असामयिक निधन के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी और कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारी संभाली। यह अनुभव उन्हें जमीन से जुड़े नेता के रूप में तैयार कर गया।

राजनीति में प्रवेश और चाचा शरद पवार का मार्गदर्शन

अजित पवार का राजनीतिक सफर उनके चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में शुरू हुआ। 1982 में सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड सदस्य के रूप में उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की समझ हासिल की।

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विद्रोह और सत्ता का खेल

2019 में अजित पवार ने पहली बार शरद पवार के खिलाफ विद्रोह किया और देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि यह सरकार केवल तीन दिन चली। बाद में वे MVA सरकार में लौटे और जुलाई 2023 में फिर बगावत कर भाजपा-शिंदे सरकार में शामिल हो गए।

चुनावों में सफलता और राजनीतिक छवि

2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद, 2024 विधानसभा चुनावों में महायुति गठबंधन की जीत में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने 41 सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की और महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी मजबूत छवि कायम रखी।

व्यक्तिगत जीवन

अजित पवार का विवाह सुनेत्रा पवार से हुआ। उनके दो बेटे हैं – जय पवार, जो व्यापार संभालते हैं, और पार्थ पवार, जो राजनीति में सक्रिय हैं। पार्थ ने 2019 में मावल सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था।

विरासत और राजनीति पर प्रभाव

अजित पवार की किसानों के हित में सक्रिय भूमिका, प्रशासनिक समझ और जनता के प्रति निष्ठा उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का एक अद्वितीय नेता बनाती थी। उनका असमय निधन राज्य और पार्टी दोनों के लिए अपूरणीय क्षति है।

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