निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पांच दिवसीय हनुमंत कथा का भव्य शुभारंभ हो गया है। पहले ही दिन कथा स्थल ढपढप में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और आस्था में डूबा नजर आया। भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
पहले दिन उमड़ा आस्था का सैलाब
कथा शुरू होते ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंच गए। मंच पर आते ही धीरेंद्र शास्त्री ने कोरबा की ऊर्जा नगरी के रूप में पहचान की सराहना की और यहां की जनता के प्रेम को विशेष बताया।
धर्मांतरण पर दिया तीखा बयान
अपने संबोधन के दौरान शास्त्री ने धर्मांतरण के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके बयान के बाद यह विषय चर्चा का केंद्र बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भटके हुए लोगों को वापस सनातन धर्म से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
कोरबा की ऊर्जा शक्ति का किया उल्लेख
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में कोरबा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह शहर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि यदि कोरबा का कोयला बंद हो जाए तो कई राज्यों में अंधेरा छा सकता है।
“मैं छत्तीसगढ़ का भांचा हूं”
अपने भावुक भाषण में उन्होंने खुद को छत्तीसगढ़ का ‘भांचा’ बताते हुए यहां की धरती को माता कौशल्या की भूमि कहा। उन्होंने श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास और समर्पण की सराहना की।
1 अप्रैल तक जारी रहेगा आयोजन
यह हनुमंत कथा 1 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इस दौरान विशेष ‘दिव्य दरबार’ का आयोजन भी किया जाएगा। आयोजन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।











