Haridev Joshi University Convocation Protest : जयपुर। राजधानी जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हरिदेव जोशी विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में बुधवार को अनुशासन की धज्जियां उड़ गईं। समारोह उस वक्त विवादों में घिर गया जब केवल 12 गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों को ही मंच पर डिग्री देने का निर्णय लिया गया, जिससे बाकी छात्र आक्रोशित हो उठे। इसी गहमागहमी के बीच छात्रा सारा इस्माइल ने मंच से यूनिवर्सिटी प्रशासन पर जो कटाक्ष किया, उसने सबको सन्न कर दिया।
क्या था पूरा मामला?
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए केवल चुनिंदा मेधावी छात्रों को ही मुख्य अतिथि के हाथों डिग्री दिलाने की व्यवस्था की थी।
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छात्रों का आक्रोश: अपनी बारी का इंतजार कर रहे अन्य छात्र-छात्राएं और उनके परिजन, जो दूर-दराज से अपने बच्चों को सम्मानित होते देखने आए थे, इस भेदभाव से नाराज हो गए।
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हंगामा और प्रदर्शन: छात्रों ने कार्यक्रम स्थल पर ही कागजात फाड़ दिए और नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति इतनी बिगड़ी कि उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा जब निकलने लगे, तो छात्र उनकी गाड़ी के आगे लेट गए।
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मंच पर तंज: भारी हंगामे के बाद जब उपमुख्यमंत्री को दोबारा लौटकर बाकी छात्रों को डिग्री देनी पड़ी, तब पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष सारा इस्माइल ने डिग्री लेते हुए माइक पर कहा— “यूनिवर्सिटी प्रशासन का बेइज्जती करके इज्जत देने का बहुत-बहुत शुक्रिया।”
छात्रा का दर्द: ‘डिग्री है या खैरात?’
सारा इस्माइल ने अपनी प्रतिक्रिया में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए:
“हम तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद सम्मान के साथ अपनी डिग्री लेने आए थे। लेकिन प्रशासन ने हमें ऐसे अपमानित किया जैसे कोई खैरात बांटी जा रही हो। हमारे माता-पिता हमें मंच पर देखना चाहते थे, लेकिन उनके सामने हमें प्रदर्शन करना पड़ा।”
प्रशासन का पक्ष: ‘निंदनीय है छात्रों का व्यवहार’
यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रतन सिंह शेखावत ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम पूरी तरह से तय प्रोटोकॉल के तहत आयोजित किया गया था। यदि छात्रों को कोई आपत्ति थी, तो उन्हें शालीनता से प्रशासन के सामने अपनी बात रखनी चाहिए थी। अतिथियों और माननीयों के सामने इस तरह का व्यवहार और नारेबाजी करना शैक्षणिक गरिमा के खिलाफ है।











