Vyapam Scam Supreme Court Update 2026 : व्यापमं घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: CBI और MP सरकार से मांगा अब तक की कार्रवाई का पूरा हिसाब; 16 अप्रैल को अगली सुनवाई

VIKASH KHALKHO
Supreme Court

Vyapam Scam Supreme Court Update 2026 : नई दिल्ली/भोपाल। देश के सबसे चर्चित और विवादित व्यापमं घोटाले (Vyapam Scam) की जांच को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत अब आर-पार के मूड में नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच की धीमी गति पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा तलब किया है।

320 पन्नों की शिकायत पर ‘जवाब तलब’

कोर्ट ने विशेष रूप से उस 320 पन्नों की विस्तृत शिकायत का जिक्र किया है, जो पूर्व विधायक पारस सकलेचा द्वारा की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि इस शिकायत में उठाए गए बिंदुओं पर अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?

  • शपथपत्र की मांग: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक दाखिल की गई चार्जशीट (आरोप पत्र) की पूरी जानकारी शपथपत्र (Affidavit) के माध्यम से पेश की जाए।

  • पारदर्शिता पर सवाल: याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि घोटाले की जांच में पारदर्शिता का अभाव है और रसूखदारों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

हाईकोर्ट से खारिज, सुप्रीम कोर्ट में ‘संजीवनी’

यह मामला पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका से जुड़ा है। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस याचिका को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे सुनवाई के लिए स्वीकार कर एक नई उम्मीद जगा दी है।

  • पैरवी: याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने दलीलें पेश कीं।

  • कोर्ट की टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायतकर्ता (Whistleblower) की भूमिका बेहद अहम होती है और उसकी दी गई जानकारियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

क्या है व्यापमं घोटाला? (एक नज़र में)

व्यापमं (अब कर्मचारी चयन मंडल) के जरिए मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगा था। करीब एक दशक पुराने इस मामले में कई रसूखदार नेता, अधिकारी और दलाल जेल जा चुके हैं, लेकिन कई मुख्य कड़ियों की जांच अभी भी अधूरी मानी जा रही है।

अगली तारीख: 16 अप्रैल 2026

सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब सीबीआई और राज्य सरकार को 16 अप्रैल से पहले अपना जवाब दाखिल करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीबीआई की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई, तो कोर्ट जांच की निगरानी के लिए नई गाइडलाइन्स जारी कर सकता है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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