निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : आईसीसी T20 World Cup 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में आज (5 मार्च 2026) मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड की टीमें आमने-सामने होंगी। यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है, क्योंकि दोनों ही टीमें टूर्नामेंट की मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं।
भारतीय टीम जहां अपने टी20 वर्ल्ड कप खिताब का बचाव कर रही है, वहीं इंग्लैंड की नजर भी तीसरी बार ट्रॉफी जीतने पर टिकी है। ऐसे में यह सेमीफाइनल मुकाबला काफी हाई-वोल्टेज रहने वाला है।
नॉकआउट मैचों में टॉस का खास ट्रेंड
टी20 वर्ल्ड कप के नॉकआउट मुकाबलों में टॉस की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। भारत ने इससे पहले 2016 में टी20 वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी। उस दौरान खेले गए सभी नॉकआउट मैचों में टॉस जीतने वाली टीम ने ही मुकाबला जीता था।
2016 के पहले सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी थी और न्यूजीलैंड को हराया था। वहीं दूसरे सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करते हुए भारत को 7 विकेट से हराया था।फाइनल मुकाबले में भी वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर इंग्लैंड को हराया और खिताब अपने नाम किया था।
2026 टूर्नामेंट में भी दिख रहा वही ट्रेंड
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भी यही ट्रेंड देखने को मिला है। पहले सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी की और साउथ अफ्रीका को 9 विकेट से हराकर फाइनल में जगह बनाई।इससे साफ है कि टॉस जीतने वाली टीम को इस टूर्नामेंट में फायदा मिल रहा है।
वानखेड़े की पिच और ओस का असर
मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है। हालांकि रात के मैचों में यहां ओस का असर भी देखने को मिलता है।ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद कर सकती है, ताकि दूसरी पारी में बल्लेबाजी आसान हो सके।
2014 से नाइट मैचों में खास पैटर्न
टी20 वर्ल्ड कप 2014 से अब तक जितने भी नॉकआउट मुकाबले रात में खेले गए हैं, उनमें ज्यादातर बार पहले गेंदबाजी करने वाली टीम को जीत मिली है।दरअसल, 2014 के बाद से खेले गए नॉकआउट मैचों में सिर्फ दो बार ही पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम जीती है और वो दोनों मैच दिन में खेले गए थे।ऐसे में भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले इस अहम सेमीफाइनल में टॉस और रणनीति दोनों ही मैच का रुख तय कर सकते हैं।











