Wednesday, August 19, 2026
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Barwani Police Violence Allegation : खाकी पर उठते सवाल: बड़वानी में चोरी की पूछताछ के दौरान परिवार को पीटने का आरोप, थाने में हंगामा

Barwani Police Violence Allegation : रायपुर/बड़वानी (13 फरवरी 2026): मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पुलिसिया कार्रवाइयों ने पिछले 24 घंटों में जमकर सुर्खियां बटोरी हैं। एक ओर जहाँ रायपुर पुलिस ने खाकी को दागदार करने वाले एक आरक्षक और उसके साथी को ड्रग्स तस्करी के मामले में गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है, वहीं दूसरी ओर बड़वानी में पुलिस पर ही पूछताछ के नाम पर एक परिवार के साथ अमानवीय मारपीट करने के आरोप लगे हैं। ये दोनों घटनाएं पुलिस की कार्यप्रणाली के दो अलग-अलग पहलुओं को उजागर कर रही हैं।

रायपुर के टिकरापारा और आजाद चौक पुलिस की संयुक्त टीम ने ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए की गई कार्रवाई में पुलिस लाइन में पदस्थ आरक्षक हिमांशु बर्मन को प्रतिबंधित ‘चिट्टा’ (हेरोइन) बेचते रंगे हाथों पकड़ा गया। आरक्षक से हुई कड़ी पूछताछ के बाद उसके साथी लक्की सिंह को भी अमलेश्वर से दबोचा गया, जिसके पास से 5.5 ग्राम नशीला पदार्थ और एक जिंदा कारतूस मिला है। एसएसपी संदीप कुमार पटेल ने स्पष्ट किया है कि पुलिस विभाग में किसी भी प्रकार की आपराधिक संलिप्तता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

वहीं, मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में स्थिति इसके उलट दिखाई दी। यहाँ चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाए गए पनवाड़ी मोहल्ले के एक परिवार ने पुलिस पर बेरहमी से पिटाई का आरोप लगाया है। पीड़ितों का दावा है कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं और एक नाबालिग के साथ मारपीट की, जिससे एक पीड़िता के हाथ में फ्रैक्चर हो गया। परिजनों ने इस घटना के विरोध में कोतवाली थाने के सामने धरना दिया और आरोप लगाया कि इलाज के दौरान उन पर यह कहने का दबाव बनाया गया कि वे ‘मोटरसाइकिल से गिरकर’ घायल हुए हैं।

इन घटनाओं के बीच प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है। बड़वानी के एसडीओपी दिनेश सिंह चौहान ने कहा कि मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी, वहीं रायपुर पुलिस अब ड्रग्स तस्करी के ‘सोर्स टू डेस्टिनेशन’ नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। जनता के बीच इन मामलों को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखी जा रही है; जहाँ एक ओर नशा मुक्ति अभियान की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर हिरासत में हिंसा की खबरों ने मानवाधिकारों और पुलिस की मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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