निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मोबाइल और टीवी का बढ़ता उपयोग अब बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।खाली समय में बाहर खेलने-कूदने की जगह बच्चे स्क्रीन पर व्यस्त रहते हैं, जिसका असर उनके व्यवहार, भावनाओं और सामाजिक जुड़ाव पर साफ दिखने लगा है।स्थिति इतनी गंभीर हो रही है कि फोन छीनने पर कई बच्चे गुस्सा, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
न्यूरो केयर सेंटर की डॉ. जोली जैन गुप्ता के अनुसार, व्यस्त जीवनशैली के कारण कई माता-पिता बच्चों को समय नहीं दे पाते और उन्हें मोबाइल या टीवी के सामने बैठा देते हैं।इस आदत से बच्चों का मानसिक संतुलन, ध्यान क्षमता और शारीरिक सक्रियता प्रभावित होती है, जिससे उनका समग्र विकास रुक सकता है।
0 से 2 साल के बच्चों के लिए सख्त सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि 0 से 2 वर्ष तक के बच्चों को पूरी तरह स्क्रीन से दूर रखना चाहिए—यहां तक कि वीडियो कॉल से भी बचाना बेहतर है।2 साल से अधिक उम्र में भी स्क्रीन टाइम बेहद सीमित होना चाहिए, ताकि दिमागी विकास पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
थेरेपी और गतिविधियों से सुधार की कोशिश
स्क्रीन की लत से जूझ रहे बच्चों के लिए न्यूरो केयर सेंटर में कई तरह की गतिविधियां कराई जाती हैं, जैसे—
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वॉइस और स्पीच थेरेपी
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फिजिकल एक्टिविटी
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रंग पहचान और संज्ञानात्मक अभ्यास
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ग्रुप थेरेपी
इन गतिविधियों से बच्चों की सामाजिक सहभागिता और ध्यान क्षमता में सुधार देखा जा रहा है।
माता-पिता के लिए जरूरी सुझाव
डॉक्टरों का कहना है कि सबसे बेहतर उपाय है बच्चों को मोबाइल न देना।यदि पढ़ाई के कारण देना जरूरी हो, तो स्क्रीन टाइम दिन में 15 मिनट तक सीमित रखें और गेम्स, वीडियो या रील्स से दूरी बनाएं।साथ ही बच्चों के साथ समय बिताना, आउटडोर खेल और रचनात्मक गतिविधियां उनके स्वस्थ विकास के लिए बेहद जरूरी हैं।









