Mobile Hacking APK File : इंदौर। मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर शहर में साइबर अपराधी अब आपके मोबाइल के भीतर ‘डिजिटल सेंधमारी’ कर रहे हैं। इंदौर क्राइम ब्रांच के ताजा आंकड़े डराने वाले हैं। महज 32 दिनों (1 जनवरी से 2 फरवरी) के भीतर पुलिस के पास मोबाइल हैकिंग और ऑनलाइन फ्रॉड की 150 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। ठगों ने ‘APK फाइल’ के जरिए लोगों के स्मार्टफोन का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में लेकर करीब ₹15 लाख की राशि पार कर दी है।
कैसे बुना जा रहा है ठगी का जाल? क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि ठग खुद को ट्रैफिक पुलिस, बैंक अधिकारी, कूरियर सर्विस कर्मी या आपका कोई परिचित बताकर व्हाट्सएप या मैसेज के जरिए एक APK फाइल भेजते हैं। यह फाइल दिखने में किसी जरूरी डॉक्यूमेंट या ऐप जैसी लगती है। जैसे ही यूजर इस पर क्लिक कर इसे इंस्टॉल करता है, मोबाइल का पूरा एक्सेस (मैसेज, गैलरी और बैंकिंग ऐप) ठगों के पास चला जाता है। इसके बाद बिना किसी ओटीपी के खाते से पैसे साफ कर दिए जाते हैं।
क्राइम ब्रांच की रडार पर ठग इन बढ़ती शिकायतों के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच की साइबर टीम एक्टिव मोड में है। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक, पुलिस इन संदिग्ध लिंक्स और फाइलों के सोर्स का पता लगा रही है। कई मामलों में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की कोशिश की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इसके पीछे कोई संगठित अंतरराज्यीय गिरोह हो सकता है जो तकनीकी रूप से काफी सक्षम है।
सावधानी ही एकमात्र बचाव पुलिस ने आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई फाइल, जिसका एक्सटेंशन .apk हो, उसे कभी डाउनलोड न करें। यह आपके फोन में ‘मैलवेयर’ प्लांट कर सकता है। साथ ही, हमेशा आधिकारिक प्ले-स्टोर से ही ऐप्स डाउनलोड करें।











