Friday, September 25, 2026
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महाकाल की भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब, गूंजा पूरा उज्जैन

Mahakal Aarti Live
Mahakal Aarti Live

Mahakal Bhasma Aarti Ujjain : मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में तड़के ब्रह्म मुहूर्त के दौरान भगवान महाकाल की दिव्य भस्म आरती पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब चार बजे जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु

महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। भक्तों ने भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति और भक्ति का अनुभव किया। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।

पंचामृत अभिषेक से शुरू हुई पूजा

भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का पारंपरिक पंचामृत अभिषेक किया गया। जल, दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से विधिवत स्नान कराने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार और रुद्रपाठ हुआ। शंखध्वनि और मंत्रों की गूंज से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

भस्म श्रृंगार की अनोखी परंपरा

महाकाल मंदिर की भस्म आरती की सबसे विशेष परंपरा भगवान का भस्म श्रृंगार माना जाता है। अभिषेक के बाद भगवान महाकाल को भस्म अर्पित कर विशेष श्रृंगार किया गया। सनातन परंपरा में भस्म को जीवन की नश्वरता, वैराग्य और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि यह आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक संदेश भी देती है।

भक्ति और साधना का अद्भुत संगम

पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में मंत्र-जप, भजन और ध्यान का वातावरण बना रहा। श्रद्धालु शांत और एकाग्र भाव से आरती के दर्शन करते नजर आए। मान्यता है कि महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होती है।

वैश्विक आस्था का केंद्र बना उज्जैन

महाकालेश्वर मंदिर आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उज्जैन की यह भस्म आरती सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है।

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