bhojshala-high-court-hearing: धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में शुक्रवार को इंदौर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखा, जबकि अधिवक्ता विनय जोशी और मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल कोर्ट में मौजूद रहे।
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष द्वारा उठाई गई आपत्तियों का खंडन करते हुए कहा कि भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है, इसलिए इस पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता।
bhojshala-high-court-hearing: हिंदू पक्ष ने कोर्ट को बताया कि भोजशाला का नाम प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारक अधिनियम 1951 की सूची में दर्ज है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि वर्ष 2024 के अश्विनी उपाध्याय मामले का न्याय दृष्टांत इस प्रकरण पर लागू नहीं होता।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि यह मामला सामान्य सिविल विवाद नहीं बल्कि मौलिक अधिकारों के हनन से जुड़ी रिट याचिका है। सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी पर पूरे दिन पूजा-अर्चना और हवन की अनुमति दिए जाने का भी हवाला दिया गया।
bhojshala-high-court-hearing: हिंदू पक्ष ने ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को निरस्त करने और भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर उसे पूर्ण रूप से हिंदू समाज को सौंपने की मांग दोहराई।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रंजना अग्निहोत्री समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी मामले में वर्ष 2024 में ASI द्वारा 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी कराया गया था।
bhojshala-high-court-hearing: अब मामले की अगली सुनवाई 11 मई 2026 को होगी, जिसमें मुस्लिम पक्ष अपना रिजॉइंडर पेश करेगा।









