India Rare Earth Strategy 2026 : नई दिल्ली। भारत ने भविष्य की तकनीक, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन (EV), विंड टर्बाइन और रक्षा उपकरणों के लिए अनिवार्य रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स (REPM) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के लिए एक एकीकृत रणनीति की घोषणा की है। वर्तमान में, भारत इन मैग्नेट्स के लिए 85-90% तक आयात (विशेषकर चीन) पर निर्भर है, जिसे कम करने के लिए सरकार ने विनिर्माण और क्षेत्रीय कॉरिडोर का एक मजबूत ढांचा तैयार किया है।
1. रेयर अर्थ कॉरिडोर: विकास के नए गलियारे
केंद्रीय बजट 2026-27 में चार प्रमुख तटीय राज्यों में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की गई है:
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ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु: ये राज्य खनिज समृद्ध हैं और यहाँ आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड की पहले से ही मजबूत उपस्थिति है।
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उद्देश्य: इन कॉरिडोर में माइनिंग (खनन), प्रोसेसिंग (प्रसंस्करण), रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग की एकीकृत सुविधाएं होंगी।
2. वित्तीय प्रोत्साहन और क्षमता निर्माण
सरकार ने नवंबर 2025 में स्वीकृत ₹7,280 करोड़ की REPM योजना के माध्यम से निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया है:
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उत्पादन लक्ष्य: 6,000 MTPA (मीट्रिक टन प्रति वर्ष) की एकीकृत विनिर्माण क्षमता।
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बिक्री आधारित प्रोत्साहन (PLI): पांच वर्षों के लिए ₹6,450 करोड़ का आवंटन।
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बुनियादी ढांचा सहायता: उन्नत विनिर्माण संयंत्र लगाने के लिए ₹750 करोड़ की पूंजीगत सब्सिडी।
3. विशाल संसाधन और अन्वेषण (Exploration)
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने भारत की खनिज क्षमता को दुनिया के सामने रखा है :
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कुल भंडार: 482.6 मिलियन टन रेयर अर्थ अयस्क की पहचान।
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मोनाजाइट: भारत के पास 13.15 मिलियन टन मोनाजाइट है, जिससे रेयर अर्थ ऑक्साइड प्राप्त होता है।
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नए क्षेत्र: गुजरात और राजस्थान की कठोर चट्टानों में भी भारी संसाधनों का पता चला है।
4. वैश्विक रणनीतिक जुड़ाव
भारत केवल घरेलू स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित कर रहा है:
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KABIL का मिशन: अर्जेंटीना में 5 लिथियम ब्लॉकों के लिए समझौता। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, जाम्बिया और पेरू जैसे देशों के साथ खनिज साझेदारी।
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बहुपक्षीय मंच: भारत ‘मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप’ (MSP) और ‘इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क’ (IPEF) का सक्रिय सदस्य है, जो वैश्विक खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
यह रणनीति केवल औद्योगिक विकास के लिए नहीं है, बल्कि यह नेट जीरो 2070 के लक्ष्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। रेयर अर्थ मैग्नेट के बिना आधुनिक मिसाइल प्रणाली, सटीक सेंसर और फाइटर जेट्स का निर्माण संभव नहीं है। इस ठोस नीतिगत ढांचे के साथ, भारत अब ‘ग्लोबल क्रिटिकल मिनरल्स वैल्यू चेन’ में एक विश्वसनीय नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी जगह बना रहा है।











