CG NEWS: रायपुर : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। 31 जनवरी को खरीदी की अंतिम तिथि नजदीक आते ही एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें कथित तौर पर अधिकारी समिति प्रबंधकों को टारगेट से अधिक धान खरीदी करने पर फटकार लगाते और चेतावनी देते सुनाई दे रहे हैं। इस ऑडियो ने खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CG NEWS: वायरल ऑडियो में समिति प्रबंधकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान टोकन की स्थिति को लेकर बातचीत हो रही है। हरदी गांव के समिति प्रबंधक यह कहते सुने जा रहे हैं कि उनके केंद्र में धान खरीदी का आंकड़ा 58 तक पहुंच सकता है। इस पर अधिकारी नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि “तुम ही टारगेट क्रॉस कर रहे हो।” आगे बातचीत में प्रबंधक बताते हैं कि पटवारी टोकन वेरीफाई कर रहे हैं, इसके बावजूद टोकन कट रहे हैं और 11 किसान अब भी लंबित हैं।
CG NEWS: इसके बाद अधिकारी सभी समिति प्रबंधकों को निर्देश देते हैं कि फिलहाल किसी भी किसान का नया टोकन न काटा जाए और जो आवेदन आएं, उन्हें पेंडिंग रखा जाए। यहां तक कहा गया कि ऑनलाइन एंट्री भी न की जाए। साथ ही हरदी समिति प्रबंधक को यह कहकर चेतावनी दी गई कि “तुम देख लो, शिकायत बहुत आ रही है।” ऑडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि मामला सारंगढ़ जिले से जुड़ा है, हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
CG NEWS: इस मामले पर राजनीति भी तेज हो गई है। सारंगढ़ की कांग्रेस विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े ने कहा कि सरकार किसानों से धान खरीदना ही नहीं चाहती। उन्होंने आरोप लगाया कि वायरल ऑडियो में साफ तौर पर अधिकारी किसानों का धान न लेने की बात कर रहे हैं। विधायक ने कहा कि समिति प्रबंधकों को धमकाया जा रहा है कि यदि टोकन काटोगे तो अंजाम भुगतना पड़ेगा।
CG NEWS: जांगड़े ने आगे कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद किसान लगातार परेशान हैं। छोटे किसान धूप में घंटों खड़े रहते हैं, लेकिन उनका धान नहीं खरीदा जा रहा। उन्होंने मांग की कि ऑडियो में जिन अधिकारी व्यास नारायण का नाम सामने आ रहा है, उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं इस पूरे मामले पर सारंगढ़-बिलाईगढ़ कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उनका कोई जवाब सामने नहीं आया।
CG NEWS: सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अब तक 23.48 लाख किसानों से धान की खरीदी की जा चुकी है और करीब 29,597 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल है। हालांकि वायरल ऑडियो ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और किसानों की परेशानी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।











