Sirmaur Tehsildar Controversy : सिरमौर (रीवा)। मध्यप्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर तहसील में तहसीलदार द्वारा शासकीय भूमि को लेकर लिया गया एक निर्णय विवादों के घेरे में आ गया है। इस फैसले ने न केवल स्थानीय लोगों को अचंभित किया है, बल्कि राजस्व विभाग की निष्पक्षता पर भी उंगली उठा दी है।

क्या है पूरा मामला? यह विवाद सिरमौर निवासी सुनैना सिंह की 30 डिसमिल निजी भूमि से सटी हुई सरकारी जमीन से जुड़ा है। सुनैना सिंह के अनुसार, उनकी जमीन के उत्तरी सरहद पर स्थित शासकीय भूमि के एक हिस्से पर उनका परिवार वर्ष 2010 से काबिज है। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले राम सुरेश शुक्ला ने इस सरकारी जमीन को हड़पने की नीयत से तहसीलदार न्यायालय में एक दावा दायर किया। राम सुरेश ने गुपचुप तरीके से खुद को उस जमीन का अधिपति बताते हुए बेदखली की मांग की थी।
नियम विरुद्ध आदेश के आरोप: पीड़ित पक्ष का कहना है कि तहसीलदार ने कानूनी पहलुओं की अनदेखी करते हुए सुनैना सिंह को बेदखल करने और राम सुरेश शुक्ला को कब्जा दिलाने का आदेश पारित कर दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार, शासकीय भूमि पर किसी निजी व्यक्ति को कब्जा दिलाने का आदेश देना स्वतः ही संदेह पैदा करता है।
कमिश्नरी में अपील के बावजूद कार्रवाई की जल्दी: जब सुनैना सिंह ने इस फैसले के खिलाफ कमिश्नर न्यायालय में अपील की, तो नियमतः मामला वरिष्ठ न्यायालय में लंबित होने तक यथास्थिति (Status Quo) बनी रहनी चाहिए थी। लेकिन आरोप है कि राजस्व अमले और स्थानीय पुलिस ने आनन-फानन में 19 जनवरी 2026 (सोमवार) को निर्माण गिराने की तिथि घोषित कर दी है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना और उच्च न्यायालय के आदेश का इंतजार किए बिना की जा रही है।
पीड़िता की गुहार: बाइट में पीड़ित भू-स्वामी सुनैना सिंह ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई और शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने तहसीलदार पर पक्षपात करने और भू-माफियाओं को संरक्षण देने का सीधा आरोप लगाया है।











