नई दिल्ली/उन्नाव : उन्नाव दुष्कर्म मामले में भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। 25 दिसंबर 2025 को अधिवक्ता अंजलि पटेल और पूजा शिल्पकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर सेंगर की सजा निलंबन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा निलंबित करते समय निचली अदालत की उस अहम टिप्पणी को नजरअंदाज कर दिया, जिसमें सेंगर को “प्राकृतिक जीवन के अंत तक” जेल में रखने का आदेश दिया गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सेंगर का आपराधिक इतिहास और अपराध की गंभीरता उसे जमानत देने से रोकने के लिए पर्याप्त आधार है।
CBI भी जाएगी सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को सेंगर की उम्रकैद की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था। कोर्ट ने यह आधार दिया कि वह करीब 7 साल 5 महीने जेल में बिता चुका है। हालांकि अब CBI ने भी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है और विशेष अनुमति याचिका (SLP) की तैयारी कर रही है।
पीड़िता की चिंता और विरोध
पीड़िता ने इस फैसले को अपने परिवार के लिए “काल” बताया है। सुरक्षा को लेकर पीड़िता और उसकी मां ने दिल्ली के इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन भी किया था।
अभी जेल में ही है सेंगर
सजा निलंबन के बावजूद सेंगर फिलहाल जेल में है, क्योंकि वह पीड़िता के पिता की कस्टडी में हुई मौत के मामले में 10 साल की सजा काट रहा है। हाईकोर्ट ने जमानत देते समय 15 लाख रुपये के मुचलके, पीड़िता के घर से 5 किमी दूर रहने और साप्ताहिक पुलिस रिपोर्टिंग जैसी कड़ी शर्तें भी लगाई हैं।
परदे के पीछे के दावे और सवाल
उन्नाव केस : परदे के पीछे की हक़ीक़त 📍
“अपने शरीर पर निशान बना लो, खुद को ज़ख़्मी कर लो”
ये आवाज़ पीड़िता के चाचा की है।
जिस शख़्स के नाम पर 17 से ज़्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, उसी ने पूरा प्लान तैयार किया ताकि कुलदीप सिंह सेंगर को जाल में फँसाया जा सके।
⚠️ यह कोई अफ़वाह नहीं… pic.twitter.com/JnFu8CEBUL— Barkha Trehan 🇮🇳 / बरखा त्रेहन (@barkhatrehan16) December 26, 2025
इस मामले में कोर्ट के दौरान सुने गए कुछ ऑडियो और दावों को लेकर भी बहस जारी है। निशानेबाज़ न्यूज़ डेस्क इस ऑडियो क्लिप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि या प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। हालांकि इन पहलुओं पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाना है। सवाल यही है कि सच, कानून और राजनीति के बीच न्याय का संतुलन कैसे बनेगा?











