भोपाल: भोपाल नगर निगम में सोमवार देर रात प्रशासनिक स्तर पर बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया। निगमायुक्त संस्कृति जैन ने आधी रात को थोक तबादलों के आदेश जारी कर दिए, जिससे निगम के प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई। एक साथ कई विभागों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं।
रिवार्ड और पनिशमेंट नीति पर कार्रवाई
यह तबादले रिवार्ड और पनिशमेंट नीति के तहत किए गए हैं। जिन अधिकारियों के विभागों में अपेक्षित कार्यप्रगति नहीं हो पाई थी, उनकी जिम्मेदारियां बदली गई हैं। वहीं, बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को अतिरिक्त जोन और विभागों का प्रभार सौंपा गया है।

कई विभागों में एक साथ बदलाव
नगर निगम के स्वास्थ्य, स्वच्छता, राजस्व, निर्माण और प्रशासनिक शाखाओं सहित कई विभागों में एक साथ तबादले किए गए। अचानक हुए इस निर्णय से निगम के आंतरिक सिस्टम पर भी असर पड़ा है, क्योंकि कई अधिकारी नए प्रभार को संभालने की प्रक्रिया में जुट गए हैं।
कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर
निगमायुक्त संस्कृति जैन का मानना है कि इस तरह के प्रशासनिक बदलावों से निगम की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा होगा। अधिकारियों को प्रदर्शन के आधार पर जिम्मेदारी सौंपने से कामकाज में गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।
कर्मचारियों में चर्चा का माहौल
आधी रात को जारी हुए तबादला आदेशों के बाद निगम कार्यालयों में दिनभर चर्चा का माहौल रहा। कई अधिकारी नए विभागों में कार्यभार ग्रहण करने पहुंचे, जबकि कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
भोपाल नगर निगम में पहली बार इस स्तर की प्रशासनिक सर्जरी देखने को मिली है। निगम कमिश्नर संस्कृती जैन ने “जिसकी जो डिग्री, उसे वही काम” के सिद्धांत पर बड़ा फैसला लेते हुए 64 इंजीनियरों सहित कई अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है।
जांच में सामने आया कि जलकार्य से जुड़े इंजीनियर भवन निर्माण जैसे कार्य देख रहे थे, जबकि सिविल इंजीनियरों से विद्युत संबंधी काम कराए जा रहे थे। इसके अलावा कई इंजीनियर अपने कार्यों का स्पष्ट हिसाब नहीं दे पा रहे थे और वर्क ऑर्डर जारी करने में भी लगातार देरी हो रही थी, जिसे लेकर निगम प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया।









