भोपाल : मध्य प्रदेश सरकार ने सोशल मीडिया और खासतौर पर यूट्यूब प्लेटफॉर्म पर फैल रही भ्रामक और तथ्यहीन सामग्री को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि ऐसे यूट्यूबर्स, जो तथ्यों के विपरीत जाकर सरकार, शासकीय विभागों, अधिकारियों या आम नागरिकों को किसी विशेष उद्देश्य से परेशान कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
DGP को कार्रवाई का खुला अधिकार
मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना को इस मामले में पूरी छूट देते हुए कहा है कि कानून के दायरे में रहकर ऐसे यूट्यूबर्स पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। सरकार का मानना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर गलत सूचनाएं फैलाना और समाज में भ्रम पैदा करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
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फेक कंटेंट पर होगी कड़ी नजर
सूत्रों के अनुसार, गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय ऐसे यूट्यूब चैनलों की सूची तैयार कर रहे हैं, जो बार-बार बिना प्रमाण के आरोप लगाकर प्रशासनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं। तकनीकी और साइबर सेल की मदद से कंटेंट की मॉनिटरिंग की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आईटी एक्ट व अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई होगी।
सड़क हादसों पर भी CM की सख्ती
इसी बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि केंद्र सरकार द्वारा जारी सड़क सुरक्षा गाइडलाइंस का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
मौतों को रोकने हर संभव प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने के लिए सिर्फ नियम ही नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान, ब्लैक स्पॉट सुधार, तेज रफ्तार पर नियंत्रण और नशे में वाहन चलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई जैसे अतिरिक्त प्रयास भी किए जाएं।
प्रशासन को दो टूक संदेश
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक ओर जहां जनहित में आलोचना का स्वागत है, वहीं दूसरी ओर दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक प्रचार पर सख्ती से रोक लगेगी। प्रशासनिक मशीनरी को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं।













