भोपाल : भोपाल के चर्चित जमीन खरीदी मामले में त्रिशूल कंस्ट्रक्शन के मालिक राजेश शर्मा को बड़ा झटका लगा है। इस प्रकरण में हाई कोर्ट द्वारा एफआईआर निरस्त किए जाने के आदेश पर अब सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद मामला फिर से कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रकरण में सभी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी।इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने भी नोटिस स्वीकार करते हुए राजेश शर्मा के साथ-साथ ट्राइडेंट मल्टी वेंचर्स, राजेश तिवारी और दीपक तुलसी को नोटिस भेजा है।
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अगली सुनवाई तक कार्रवाई पर रोक
शीर्ष अदालत ने मामले में अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई न करने के निर्देश दिए हैं। इससे यह साफ हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले को पूरी गंभीरता से परखना चाहता है और तब तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं।
जमीन खरीदी में किसान से धोखाधड़ी का आरोप
यह पूरा मामला जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि एक किसान को धोखे में रखकर जमीन सौदे में नुकसान पहुंचाया गया। इसी आधार पर पहले एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में हाई कोर्ट ने एफआईआर को निरस्त कर दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
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30 जनवरी 2026 को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 30 जनवरी 2026 तय की है। तब तक निचली अदालतों और प्रशासन को किसी भी तरह की कार्रवाई से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं।कानूनी जानकारों का मानना है कि इस सुनवाई के बाद ही यह तय हो पाएगा कि एफआईआर बहाल होगी या हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा।
कानूनी दायरे में सिमटा मामला
इस प्रकरण ने एक बार फिर रियल एस्टेट सेक्टर और जमीन सौदों में पारदर्शिता के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब सभी की निगाहें आने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।













