बलरामपुर : वाड्रफनगर के नागरिक लंबे समय से बायपास सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी यह सड़क अधर में लटकी हुई है। इसका असर नगरवासियों पर प्रतिदिन दिखाई देता है, क्योंकि भारी वाहनों के कारण जाम की स्थिति और सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है।
बीजेपी शासन में भूमि पूजन हुआ था, लेकिन कार्य रुका
2017-18 में भाजपा शासन के दौरान तत्कालीन गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने बलरामपुर जिले को करोड़ों की सौगात देते हुए वाड्रफनगर के लिए बायपास रोड का भूमि पूजन किया था। तत्काल स्वीकृति और बजट भी आवंटित किया गया था। टेंडर भी हो चुका था और कार्य शुरू होने ही वाला था।
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लेकिन 2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सत्ता में आने के बाद कार्य को रोक दिया गया। इसके बाद 5 वर्षों तक सड़क निर्माण अधर में लटकी रही।
बीजेपी फिर सत्ता में, लेकिन सड़क अधूरी
2023 में फिर से भाजपा सत्ता में आई, लेकिन अब दो साल बीतने के बाद भी बायपास सड़क कार्य पूरा नहीं हो पाया। नगरवासियों के अनुसार यह देरी सवालिया निशान पैदा करती है। भारी वाहनों की आवाजाही और जाम की समस्या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित कर रही है।
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समस्या और जिम्मेदारी
नगरवासियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक, तेज इंटरनेट और 5G/6G के दौर में भी शासन-तंत्र और प्रशासन वही पुराने ढर्रे पर हैं। चाहे शासन कोई भी हो, सिस्टम में कोई बदलाव नहीं आया, जिससे जनता को अब भी समस्या का समाधान नहीं मिल सका।
यह बायपास सड़क अधर में लटकने की कहानी अब एक पहेली बन चुकी है: आखिर जिम्मेदार कौन है और नगरवासियों की समस्या कब हल होगी।











