CG NEWS : सुप्रीम कोर्ट का अल्टीमेटम: दिसंबर तक पूरी करें शराब घोटाले की जांच, ED-EOW से फाइनल रिपोर्ट मांगी

CG NEWS : रायपुर : छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को दिसंबर 2025 तक जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जांच को शुरू हुए लगभग दो साल हो चुके हैं, इसलिए अब इसे नतीजे तक पहुंचाना जरूरी है। दिसंबर के आखिरी सप्ताह तक दोनों एजेंसियों को अपनी फाइनल रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा करनी होगी।

CG NEWS : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ED और EOW ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। ED इस समय आबकारी विभाग के करीब 30 अधिकारियों से पूछताछ कर रही है, जिनमें 7 रिटायर्ड अधिकारी भी शामिल हैं।

CG NEWS : इससे पहले कोर्ट ने शराब घोटाले से जुड़ी 13 याचिकाओं — जिनमें अलग-अलग FIR, ED की ECIR और जमानत याचिकाएं शामिल थीं — पर सुनवाई के बाद सभी को खारिज कर दिया था। जस्टिस एम.एम. सुन्दरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर पूरक आरोपपत्र दायर किया जाए। इसके बाद याचिकाकर्ता नियमित या अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

CG NEWS : अब तक इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, कारोबारी अनवर ढेबर, IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल समेत दस से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

CG NEWS : ED और EOW की जांच के अनुसार, यह घोटाला 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का है। आरोप है कि भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी ए.पी. त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर ने मिलकर एक सिंडिकेट बनाया, जिसने शराब की आपूर्ति और बिक्री में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया।

CG NEWS : फरवरी 2019 में बनाए गए इस सिंडिकेट ने शराब कारोबार को तीन हिस्सों — A, B और C — में बांटकर अलग-अलग तरीकों से अवैध कमाई की:

A पार्ट: डिस्टलरी मालिकों से प्रति पेटी कमीशन लिया गया।
B पार्ट: नकली होलोग्राम लगाकर शराब को सरकारी दुकानों से बेचा गया।
C पार्ट: डिस्टलरी की सप्लाई एरिया को बदलकर अवैध वसूली की गई।

CG NEWS : EOW के अनुसार, डिस्टलरीज से मिलने वाले कमीशन और नकली शराब की बिक्री से हुए मुनाफे में से लगभग 15% हिस्सा अनवर ढेबर को मिलता था, जिसे वह अपने रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम से बनाई गई कंपनियों में निवेश करता था।

CG NEWS : तीन वित्तीय वर्षों के दौरान डिस्टलरीज ने केवल “पार्ट C” के तहत ही करीब 52 करोड़ रुपये सिंडिकेट को दिए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस अवैध धन का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया।

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