रिपोर्टर : रामकुमार भारद्वाज/बुरहानपुर – बुरहानपुर में “प्रकृति एवं मानव जीवन पर रासायनिक खेती के नुकसान एवं निदान” विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तेलंगाना के सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (सीएसए) के कार्यकारी संचालक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामान्जनयेलू और विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री अर्चना चिटनिस ने उपस्थित किसानों और नागरिकों को संबोधित किया।
कार्यशाला का आयोजन कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम आत्मा बुरहानपुर, सीएसए तेलंगाना और सतपुड़ा नेचर फ्रेश के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर नेपानगर विधायक सुश्री मंजू राजेन्द्र दादू, महापौर श्रीमती माधुरी अतुल पटेल, और जिले के अनेक किसान भी उपस्थित रहे।
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विधायक अर्चना चिटनिस ने बताया कि बुरहानपुर जिले में रासायनिक उर्वरकों और पेस्टीसाइड का अत्यधिक उपयोग किया जाता है। उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए फसल अवशेष, गोबर, कम्पोस्ट, जीवामृत, पंचगव्य और जैव उर्वरकों का उपयोग किया जाए। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ और सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ेगी, जो फसल उत्पादन को भी बढ़ावा देगा। इसके साथ ही उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और उत्पादित जहर-मुक्त फसलों के लिए स्थानीय बाजार उपलब्ध कराने की भी सलाह दी।
डॉ. रामान्जनयेलू ने बताया कि तेलंगाना राज्य पहले रासायनिक उर्वरक और पेस्टीसाइड के उपयोग में भारत में तीसरे स्थान पर था। उन्होंने कहा कि अब 10 लाख हेक्टेयर में जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाकर तेलंगाना पूरे विश्व में इस क्षेत्र में अग्रणी बन गया है।
कार्यशाला में उपस्थित किसानों और नागरिकों ने जैविक और प्राकृतिक खेती के महत्व को समझते हुए इसके प्रति जागरूकता दिखाई।
अर्चना चिटनिस, विधायक – “प्राकृतिक खेती अपनाकर हम मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ा सकते हैं और किसानों की आमदनी में सुधार कर सकते हैं।”











