Monday, September 28, 2026
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Budhadev Pahadi Fire Update : डोंगरगढ़ की बुढ़ादेव पहाड़ी पर भीषण आग का तांडव: सूखी घास और तेज हवाओं ने बढ़ाई मुश्किल; शहर में दहशत, दमकल की पहुंच से बाहर लपटें

Budhadev Pahadi Fire Update : डोंगरगढ़। राजनांदगांव जिले के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल डोंगरगढ़ के बीचों-बीच स्थित प्राचीन बुढ़ादेव पहाड़ी शुक्रवार रात अचानक धधक उठी। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरी पहाड़ी लाल लपटों और धुएं के गुबार से घिर गई। पहाड़ी पर मौजूद सूखी घास और घनी झाड़ियों ने आग के लिए ईंधन का काम किया, जिससे लपटें तेजी से ऊपरी हिस्सों की ओर फैलती चली गईं। शहर के रिहाइशी इलाकों से आग का यह तांडव साफ देखा जा सकता है, जिससे स्थानीय लोगों में अनहोनी की आशंका और भारी दहशत व्याप्त है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के कुछ ही देर बाद तेज हवाओं ने इसे और भी भयावह बना दिया। पहाड़ी क्षेत्र की दुर्गम बनावट के कारण नगरपालिका की दमकल टीमें और गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच पा रही हैं। संसाधनों की कमी और ऊँचाई के कारण आग बुझाने के शुरुआती प्रयास विफल साबित हुए हैं। खबर लिखे जाने तक आग पर काबू पाने के लिए कोई ठोस प्रशासनिक सक्रियता नजर नहीं आई है, जिससे स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश भी देखा जा रहा है। लोग अपने स्तर पर बाल्टियों और सीमित साधनों से बचाव की कोशिश कर रहे हैं, जो ऊँची लपटों के सामने नाकाफी साबित हो रहे हैं।

बुढ़ादेव पहाड़ी न केवल प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र है, बल्कि यह स्थानीय लोगों की गहरी आस्था और धार्मिक विश्वास से भी जुड़ी हुई है। इस भीषण आगजनी से पहाड़ी क्षेत्र की जैव विविधता और वहां मौजूद वन्य जीवों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। पर्यावरण प्रेमियों ने चिंता जताई है कि यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो पहाड़ी की हरियाली पूरी तरह राख में तब्दील हो जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को तत्काल हेलीकॉप्टर या अन्य आधुनिक तकनीकों की मदद लेनी चाहिए ताकि आग को रिहाइशी इलाकों तक पहुंचने से रोका जा सके।

फिलहाल स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। आग की लपटें पहाड़ी के शिखर की ओर बढ़ रही हैं और धुआं पूरे शहर की आबोहवा को प्रभावित कर रहा है। डोंगरगढ़ नगरपालिका और जिला प्रशासन के लिए यह बड़ी चुनौती बन गई है कि वे इस दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में आग पर कैसे काबू पाते हैं। वन्यजीव प्रेमियों ने भी पहाड़ी पर रहने वाले छोटे जानवरों और पक्षियों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है।

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