Gangster Act Vs BNS : हाईकोर्ट का बड़ा वार, योगी सरकार को 21 दिन की मोहलत – दो कानून, एक मकसद क्यों

Parivesh
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Gangster Act Vs BNS : प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। गैंगस्टर एक्ट की वैधता पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने योगी सरकार से तीन हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने मिर्जापुर निवासी विजय सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

क्या है मामला?

विजय सिंह के खिलाफ यूपी पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। उन्होंने इसे राजनीतिक द्वेष का नतीजा बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना है कि जिन मामलों के आधार पर यह केस दर्ज हुआ है, उन सभी में वह जमानत पर रिहा हैं और पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

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कोर्ट का कड़ा रुख

याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विजय सिंह की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि जब भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत पहले से ही संगठित अपराधों के लिए विस्तृत और सख्त प्रावधान किए गए हैं, तो फिर उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की मौजूदा जरूरत क्या है? विजय सिंह के वकील ने तर्क दिया कि सरकार कानून का दुरुपयोग कर रही है और गैंगस्टर एक्ट का सहारा लेकर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि विजय सिंह संगठित अपराध गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल हैं और उन पर कार्रवाई कानून के दायरे में ही की गई है।

अगली सुनवाई की तैयारी

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि अगर BNS पहले से ही संगठित अपराधों के खिलाफ पर्याप्त है, तो फिर गैंगस्टर एक्ट जैसी समानांतर व्यवस्था का औचित्य क्या है? कोर्ट ने तीन हफ्तों में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है और तब तक याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि पूरे राज्य में कानून के समानांतर चल रही व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना है कि योगी सरकार इस कानूनी चुनौती का क्या जवाब देती है।

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