Friday, September 11, 2026
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Niti Aayog VC Ashok Lahiri Statement UPI: ‘सेवा की गुणवत्ता महत्वपूर्ण’, UPI चार्जेस पर बोले नीति आयोग के वाइस चेयरमैन

मुंबई। Nishaanebaz.com-UPI Charges News GFF 2026: भारत में डिजिटल लेनदेन की रीढ़ बन चुके यूपीआई (UPI) के मुफ्त इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। मुंबई में आयोजित ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ (GFF 2026) के दौरान नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक लाहिड़ी ने स्पष्ट किया कि यूपीआई को लंबे समय तक पूरी तरह मुफ्त नहीं रखा जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि फिनटेक कंपनियों और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के पास एक टिकाऊ और आत्मनिर्भर वित्तीय मॉडल (Sustainable Financial Model) होना बेहद जरूरी है।

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इंटरव्यू के दौरान जब नीति आयोग के वाइस चेयरमैन से मर्चेंट पेमेंट्स पर यूपीआई शुल्क लागू करने की समय-सीमा पूछी गई, तो उन्होंने कहा कि वह कोई निश्चित तारीख तो नहीं बता सकते, लेकिन यह व्यवस्था जितनी जल्दी लागू हो उतना बेहतर है। उन्होंने तर्क दिया कि यूपीआई के इंफ्रास्ट्रक्चर, सेटअप और रोजाना के संचालन (Operating Costs) में भारी लागत आती है। उपभोक्ता भले ही हर सेवा मुफ्त में चाहते हों, लेकिन बिना किसी आय के इतनी बड़ी व्यवस्था को हमेशा चलाना व्यावहारिक नहीं है। शुल्क का ढांचा एक्सपर्ट्स तय करेंगे कि यह बिजनेस-टू-बिजनेस होगा, पीयर-टू-पीयर मुफ्त रहेगा या कोई न्यूनतम सीमा तय की जाएगी।

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शुल्क लागू होने के बाद उपयोगकर्ताओं द्वारा यूपीआई का इस्तेमाल कम करने की आशंकाओं पर डॉ. लाहिड़ी ने विश्वास जताया कि इसका बहुत मामूली असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि शुल्क लगता भी है, तो वह महज कुछ ‘बेसिस पॉइंट्स’ (1 प्रतिशत से भी काफी कम) होगा। भारतीय उपभोक्ताओं का एक बड़ा वर्ग ₹100 के लेनदेन पर कुछ पैसों का मामूली शुल्क देने के बजाय सेवा की निर्बाध गुणवत्ता, सुरक्षा और भरोसे को अधिक प्राथमिकता देता है।

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गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा जीरो-एमडीआर (Zero-MDR) अनिवार्यता के नियमों में ढील दी गई है, ताकि कुछ चुनिंदा एवं उच्च-मूल्य (High Value) के डिजिटल ट्रांजैक्शन पर मामूली मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाया जा सके। हालांकि आम व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर पर एक्स्ट्रा चार्ज की खबरों का खंडन किया जाता रहा है, लेकिन नीति आयोग के उपाध्यक्ष के इस ताजा बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि आने वाले समय में फिनटेक सेक्टर के स्थायित्व के लिए मर्चेंट पेमेंट्स पर मामूली शुल्क लागू किया जा सकता है।

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