Shivpuri News: शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की रन्नौद नगर परिषद से सरकारी लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक अधिकारी की कथित चूक के कारण मृत पिता की जगह जीवित बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इस एक गलती ने युवक की पूरी जिंदगी प्रभावित कर दी। सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के कारण वह तीन वर्षों तक सरकारी योजनाओं और जरूरी दस्तावेजों का लाभ नहीं ले सका। अब पीड़ित ने कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।
पिता की मौत हुई, लेकिन रिकॉर्ड में बेटा हो गया ‘मृत’
पीड़ित गिटला आदिवासी ने बताया कि वर्ष 2022 में उनके पिता जगनी आदिवासी का निधन हो गया था। परिवार ने नियमानुसार नगर परिषद में मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। वर्ष 2023 में प्रमाण पत्र जारी करते समय अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही करते हुए मृतक पिता की जगह जीवित बेटे गिटला आदिवासी का नाम दर्ज कर दिया। इसके बाद सरकारी रिकॉर्ड में गिटला आदिवासी को मृत घोषित कर दिया गया।
एक गलती ने छीन लिए सरकारी अधिकार
Shivpuri News: सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के बाद गिटला आदिवासी का आधार कार्ड, राशन कार्ड, कुटीर योजना समेत कई सरकारी योजनाओं का लाभ बंद हो गया। बैंकिंग और अन्य सरकारी कार्यों में भी उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि हर विभाग में उन्हें पहले यह साबित करना पड़ता था कि वह जीवित हैं।
तीन साल तक लगाते रहे सरकारी दफ्तरों के चक्कर
पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने नगर परिषद और संबंधित विभागों में कई बार आवेदन दिए, लेकिन किसी अधिकारी ने समय रहते गलती सुधारने की पहल नहीं की। तीन वर्षों तक लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी रही। आखिरकार मजबूर होकर उन्होंने कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई।
प्रशासन ने मानी गलती, फिर भी अधूरा समाधान
Shivpuri News: मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने गिटला आदिवासी के नाम से जारी गलत मृत्यु प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया है। हालांकि, उनके दिवंगत पिता जगनी आदिवासी के नाम से सही मृत्यु प्रमाण पत्र अब तक जारी नहीं हो सका है। ऐसे में परिवार को अभी भी कई जरूरी प्रक्रियाओं में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
लापरवाही पर उठे सवाल, कार्रवाई की मांग
इस मामले ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते रिकॉर्ड की जांच होती, तो एक जीवित व्यक्ति को तीन साल तक सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित नहीं रहना पड़ता। अब पीड़ित ने प्रशासन से न केवल सभी सरकारी रिकॉर्ड तत्काल सुधारने, बल्कि इस गंभीर लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।




