Cyber Fraud Student: इंदौर। साइबर अपराधियों ने एक मेहनतकश छात्र की वर्षों की मेहनत पर कुछ ही मिनटों में पानी फेर दिया। मध्य प्रदेश के अशोकनगर निवासी केशव सैन, जो इंदौर में एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में काम करते हैं, अपनी बीटेक की पढ़ाई जारी रखने के लिए दिन-रात मेहनत और ओवरटाइम कर फीस के पैसे जमा कर रहे थे। लेकिन साइबर ठगों ने उनके बैंक खाते से ₹48,000 निकाल लिए, जिससे उनकी पढ़ाई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
मजदूरी कर जुटाए थे फीस के पैसे
Cyber Fraud Student: केशव सैन आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं। उच्च शिक्षा का सपना पूरा करने के लिए वे इंदौर में मजदूरी कर हर महीने अपनी कमाई में से कुछ राशि बचा रहे थे। लंबे समय की मेहनत के बाद उन्होंने बीटेक की फीस जमा करने के लिए ₹48 हजार इकट्ठा किए थे, लेकिन साइबर ठगों ने कुछ ही मिनटों में उनकी पूरी जमा-पूंजी साफ कर दी।
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Amazon Pay के जरिए हुए लगातार ट्रांजेक्शन
पीड़ित के अनुसार, अचानक उनके मोबाइल पर बैंक खाते से लगातार ट्रांजेक्शन के मैसेज आने लगे। जब तक वे खाते की जानकारी समझ पाते, तब तक Amazon Pay के माध्यम से कई लेनदेन हो चुके थे और खाते में मौजूद पूरे ₹48 हजार निकल चुके थे। उनके लिए यह सिर्फ पैसे नहीं थे, बल्कि उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद थी।
1930 हेल्पलाइन से भी नहीं मिली तत्काल मदद
Cyber Fraud Student: रुपये निकलने का पता चलते ही केशव ने तत्काल केंद्र सरकार की साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया। उनका आरोप है कि ट्रांजेक्शन रोकने या तत्काल कार्रवाई करने के बजाय उन्हें नजदीकी थाने जाने की सलाह दी गई। इसके बाद वे इंदौर क्राइम ब्रांच पहुंचे, लेकिन वहां भी तत्काल कार्रवाई नहीं हुई। केशव का कहना है कि उन्हें तीन दिन बाद आने के लिए कहा गया, जिससे समय रहते रकम रिकवर होने की संभावना भी कम हो गई।
पढ़ाई पर मंडराया संकट
Cyber Fraud Student: केशव का कहना है कि यदि समय पर उनकी शिकायत पर कार्रवाई होती, तो शायद उनकी मेहनत की कमाई बचाई जा सकती थी। अब फीस जमा नहीं होने के कारण उनकी बीटेक की पढ़ाई बीच में रुकने का खतरा पैदा हो गया है। आर्थिक तंगी और साइबर ठगी ने उनके भविष्य को अनिश्चित बना दिया है।
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साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर साइबर सुरक्षा व्यवस्था और 1930 हेल्पलाइन की त्वरित प्रतिक्रिया पर सवाल खड़े करता है। सरकार लगातार लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने की सलाह देती है, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि कई मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होने से ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना बेहद कम रह जाती है।फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और साइबर ठगों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।







