High Court Stay on Excise Department Action: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (High Court) ने राज्य के आबकारी विभाग द्वारा की गई एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने बिना कोई पूर्व नोटिस जारी किए दो डिस्टिलरी कंपनियों के खिलाफ आबकारी आयुक्त द्वारा जारी किए गए आदेश पर स्टे लगाते हुए संबंधित कंपनियों को बड़ी राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रथम दृष्टया यह माना कि कंपनियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना की गई प्रशासनिक कार्रवाई प्राकृतिक न्याय (Principles of Natural Justice) के मूलभूत सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है।
बिना कारण बताओ नोटिस कार्रवाई पर जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की पीठ ने आबकारी विभाग की कार्यशैली और प्रक्रिया पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या वैधानिक कार्रवाई करने से पूर्व प्रभावित पक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी करना और अपना रुख स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त अवसर देना अनिवार्य है। बिना किसी पूर्व सूचना के कंपनियों का काम रोकना प्रशासनिक शक्तियों का अनुचित इस्तेमाल है।
लाइव आईडी और पासवर्ड ब्लॉक करने के आदेश पर भी स्टे
हाईकोर्ट ने आबकारी आयुक्त के पूर्व आदेश के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही विभाग द्वारा डिस्टिलरी कंपनियों की लाइव आईडी (Live ID) और पासवर्ड को निष्क्रिय/ब्लॉक करने की जो कार्रवाई की गई थी, उस पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने आदेशित किया है कि कंपनियों की ऑनलाइन प्रणाली को तुरंत बहाल किया जाए, ताकि उनका नियमित व्यावसायिक कामकाज किसी भी तरह से बाधित या प्रभावित न हो।
जांच में पूरा सहयोग करेंगी कंपनियां
अदालत ने अंतरिम राहत प्रदान करने के साथ-साथ याचिकाकर्ता डिस्टिलरी कंपनियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राहत मिलने का तात्पर्य यह नहीं है कि वे जांच से बच सकती हैं। संबंधित दोनों डिस्टिलरी कंपनियां आबकारी विभाग द्वारा की जा रही जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग प्रदान करेंगी और जांच में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं करेंगी।
22 जुलाई को आबकारी आयुक्त के समक्ष होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली प्रशासनिक सुनवाई और संबंधित पक्षों की उपस्थिति के लिए 22 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की गई है। इस दौरान दोनों डिस्टिलरी कंपनियां आबकारी आयुक्त के समक्ष उपस्थित होकर अपना आधिकारिक पक्ष और दस्तावेज प्रस्तुत करेंगी। कंपनियों का पक्ष सुनने और साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद ही आबकारी विभाग द्वारा नियमानुसार आगे की कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।







