Ujjain Health News: उज्जैन। शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाला सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी एक नई मिसाल कायम करने जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में जल्द ही 50 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक आयुष चिकित्सालय स्थापित किया जाएगा। यह मध्य प्रदेश का पहला ऐसा आयुष अस्पताल होगा, जो किसी विश्वविद्यालय परिसर में संचालित होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरू होने से न केवल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि उज्जैन शहर के नागरिकों और भविष्य में सिंहस्थ महाकुंभ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
विश्वविद्यालय की कार्य परिषद (एक्जीक्यूटिव काउंसिल) की बैठक में अस्पताल निर्माण के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत विश्वविद्यालय प्रशासन ने करीब दो एकड़ भूमि आयुष विभाग को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय और आयुष विभाग के बीच इस परियोजना को लेकर एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) भी हो चुका है। अब प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अस्पताल निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।
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Ujjain Health News: विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अर्पण भारद्वाज ने बताया कि वर्तमान समय में विश्वविद्यालय परिसर में 800 से अधिक छात्र-छात्राएं छात्रावासों में रहकर अध्ययन कर रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और शोधार्थी भी प्रतिदिन विश्वविद्यालय आते हैं। ऐसे में किसी भी स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में सभी को शहर के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। आयुष चिकित्सालय बनने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में ही बेहतर और त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे समय की बचत होने के साथ इलाज भी आसानी से मिल सकेगा।
उन्होंने बताया कि यह अस्पताल केवल विश्वविद्यालय परिवार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के क्षेत्र में रहने वाले नागरिक भी यहां उपचार का लाभ उठा सकेंगे। इससे उज्जैन की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा मिलेगा।
Ujjain Health News: प्रस्तावित 50 बिस्तरीय आयुष चिकित्सालय को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। यहां आयुर्वेद चिकित्सा के साथ-साथ पंचकर्म, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, वेलनेस सेंटर, ओपीडी और आईपीडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार की व्यवस्था भी की जाएगी। अस्पताल में प्रशिक्षित चिकित्सकों और विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध रहेंगी, जिससे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण आयुष चिकित्सा एक ही परिसर में मिल सकेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में आयुष चिकित्सा, शोध और प्रशिक्षण का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकती है। इससे विद्यार्थियों को स्वास्थ्य जागरूकता, योग और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़ी गतिविधियों का लाभ मिलेगा और विश्वविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण भी अधिक समृद्ध होगा।
Ujjain Health News: आगामी सिंहस्थ महाकुंभ-2028 को देखते हुए इस अस्पताल की उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। सिंहस्थ के दौरान देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। ऐसे में आयुष आधारित चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी। आयुर्वेद, पंचकर्म और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी सेवाओं के माध्यम से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का भी अनुभव कर सकेंगे।
परियोजना के तहत विश्वविद्यालय भवन और भूमि उपलब्ध कराएगा, जबकि अस्पताल का संचालन, चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ की नियुक्ति, दवाइयों की व्यवस्था और चिकित्सा सेवाओं का संपूर्ण संचालन आयुष विभाग द्वारा किया जाएगा। इससे विश्वविद्यालय पर अतिरिक्त प्रशासनिक भार नहीं आएगा और अस्पताल का संचालन विशेषज्ञ विभाग की निगरानी में होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालय परिसर में आयुष चिकित्सालय की स्थापना से शिक्षा और स्वास्थ्य का बेहतर समन्वय देखने को मिलेगा। यह पहल न केवल विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए लाभदायक होगी, बल्कि उज्जैन को आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में भी नई पहचान दिलाने का काम करेगी। प्रदेश में पहली बार किसी विश्वविद्यालय परिसर में बनने जा रहा यह अस्पताल भविष्य में अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकता है।







