Wednesday, August 26, 2026
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Bilaspur Housing Board Negligence: 17 साल में खंडहर बने करोड़ों के सरकारी बंगले, फंड के अभाव में काम ठप

Bilaspur Housing Board Negligence: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर से सरकारी व्यवस्था और प्रशासनिक अदूरदर्शिता का एक बड़ा मामला सामने आया है। बिलासपुर के बिरकोना इलाके में राज्य गृह निर्माण मंडल (हाउसिंग बोर्ड) द्वारा लगभग 17 साल पहले सरकारी अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे करोड़ों रुपये के HIG (हाई इनकम ग्रुप) आवास आज पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। केवल नाली और सड़क निर्माण के लिए अतिरिक्त फंड न मिलने के कारण पूरे प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़ दिया गया, जिसका खामियाजा अब सरकारी राजस्व के भारी नुकसान के रूप में सामने आया है।

2008-09 में शुरू हुआ था पौने दो करोड़ का प्रोजेक्ट

प्राप्त विवरण के अनुसार, वर्ष 2008-09 में बिलासपुर में पदस्थ सरकारी अधिकारियों के लिए आवासीय संकट को दूर करने के उद्देश्य से हाउसिंग बोर्ड ने बिरकोना में लगभग पौने दो करोड़ रुपये की लागत से HIG आवासों के निर्माण का निर्णय लिया था। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग की सिफारिश पर कोनी-बिरकोना क्षेत्र में जमीन चिह्नित की गई और निर्माण कार्य शुरू कराया गया। निर्माण कार्य काफी तेजी से आगे बढ़ा और लगभग आधे से अधिक यानी अंतिम चरण तक पहुंच गया था।

सड़क-नाली के बजट पर अटका काम, फिर शुरू हुआ बर्बादी का दौर

आवासों का मुख्य ढांचा खड़ा होने के बाद अंतिम चरण में परिसर के भीतर नाली और पहुँच मार्ग (सड़क) का निर्माण कराया जाना था। इसके लिए हाउसिंग बोर्ड से अतिरिक्त बजट की मांग की गई, लेकिन विभाग की ओर से इस मांग को खारिज कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि मामूली फंड के अभाव में पूरा काम ठप हो गया। देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे ये निर्माणाधीन भवन असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गए। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि चोर इन मकानों में लगे कीमती खिड़की, दरवाजे और अन्य फिटिंग्स उखाड़ कर ले गए हैं और अब केवल ईंटों की खाली दीवारें ही बची हैं।

एक तरफ खंडहर हो रहे मकान, दूसरी तरफ स्टाफ परेशान

एक ओर जहां सरकारी खजाने से बना यह ढांचा जीर्ण-शीर्ण होकर नष्ट हो रहा है, वहीं दूसरी ओर बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी और पंडित सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी का शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक अमला क्वार्टर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। दोनों विश्वविद्यालयों के प्रशासन ने पूर्व में इन तैयार ढाँचों को अपने अधिकार में लेकर पूरा कराने और स्टाफ को आवंटित करने की पहल की थी, लेकिन लालफीताशाही और प्रशासनिक फाइलों के बीच यह प्रस्ताव दबकर रह गया।

ज्यूडिशियरी के लिए शुरू हुई चर्चा

मामले पर हाउसिंग बोर्ड के एडिशनल कमिश्नर अजीत पटेल ने बताया कि बिरकोना स्थित इन अधूरे HIG बंगलों को लेकर हाल ही में ज्यूडिशियरी (न्यायपालिका) विभाग की ओर से मांग पत्र प्राप्त हुआ है। वर्तमान में शासन स्तर पर इन भवनों को पूरा कराकर उपयुक्त उपयोग में लाने के संबंध में उच्च स्तरीय बातचीत चल रही है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासनिक संवेदनशीलता दिखाई जाती, तो करोड़ों की सरकारी संपत्ति को इस तरह बर्बाद होने से बचाया जा सकता था।

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