CG News: बिलासपुर में करोड़ों की हाउसिंग परियोजना का बुरा हाल, आखिर कौन जिम्मेदार ?

Rahul Goshwami

Bilaspur Housing Board Houses: बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान एक बार फिर चर्चा में हैं। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बिरकोना इलाके में सरकारी अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे एचआईजी (HIG) मकान करीब 17 साल बाद भी अधूरे पड़े हैं। निर्माण पूरा नहीं होने के कारण ये मकान अब खंडहर में बदल चुके हैं। इस पूरे मामले ने सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008-09 में की गई थी। सरकारी अधिकारियों को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हाउसिंग बोर्ड ने लगभग 1.75 करोड़ रुपये की लागत से एचआईजी मकानों के निर्माण का फैसला लिया था। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने कोनी क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराई और निर्माण कार्य भी शुरू हो गया।

बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान: फंड की कमी से अधूरा रह गया निर्माण
बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान निर्माण का अधिकांश काम पूरा हो चुका था। जानकारी के अनुसार, अंतिम चरण में सड़क और नाली जैसे बुनियादी कार्य बाकी थे। इसके लिए अतिरिक्त राशि की आवश्यकता थी। हाउसिंग बोर्ड से अतिरिक्त फंड की मांग की गई, लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद निर्माण कार्य रुक गया और परियोजना अधूरी रह गई।
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बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान: अब सिर्फ दीवारें बची हैं
बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान वर्षों तक अधूरे पड़े रहने के कारण पूरी तरह जर्जर हो गए हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार, इन मकानों में लगे खिड़की-दरवाजे भी चोरी हो चुके हैं। अब वहां केवल ईंटों की दीवारें और अधूरे ढांचे दिखाई देते हैं। लंबे समय से रखरखाव नहीं होने के कारण भवनों की स्थिति लगातार खराब होती गई।

बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान: दूसरी ओर स्टाफ को नहीं मिल रहे क्वार्टर
बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान अधूरे पड़े हैं, जबकि दूसरी ओर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय और पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के कर्मचारी आवास की कमी का सामना कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि दोनों विश्वविद्यालयों ने इन भवनों को अपने उपयोग के लिए लेने का प्रयास भी किया था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान: शासन स्तर पर फिर शुरू हुई चर्चा
बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान को लेकर अब शासन स्तर पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। हाउसिंग बोर्ड के अतिरिक्त आयुक्त अजीत पटेल के अनुसार, इन एचआईजी बंगलों के उपयोग को लेकर न्यायपालिका की ओर से मांग प्राप्त हुई है। इस प्रस्ताव पर शासन स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। यदि फैसला होता है, तो वर्षों से खाली पड़े इन भवनों का उपयोग किसी सरकारी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।

बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान: क्या अब मिलेगा समाधान?
बिलासपुर हाउसिंग बोर्ड मकान का मामला यह दिखाता है कि समय पर निर्णय और पर्याप्त बजट नहीं मिलने से बड़ी सरकारी परियोजनाएं भी अधूरी रह सकती हैं। अब देखना होगा कि शासन स्तर पर चल रही चर्चा के बाद इन भवनों का निर्माण पूरा किया जाता है या किसी अन्य विभाग को सौंपकर उनका उपयोग शुरू किया जाता है। फिलहाल यह परियोजना प्रशासनिक लापरवाही और अधूरी योजनाओं की एक बड़ी मिसाल बनी हुई है।

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