Apollo Hospital Bilaspur Fraud: खुद को बताया एमबीबीएस-कार्डियोलॉजिस्ट, अपोलो अस्पताल में करता रहा एंजियोप्लास्टी; फर्जी डॉक्टर की खुली पोल

VIKASH KHALKHO

Apollo Hospital Bilaspur Fraud: बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से चिकित्सा जगत को झकझोर देने वाले ‘फर्जी डॉक्टर’ नरेंद्र विक्रमादित्य यादव मामले में पुलिस प्रशासन ने अपनी जांच पूरी कर ली है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ स्थानीय अदालत में पुख्ता चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी है। आरोपी पर आरोप है कि उसने बिलासपुर के प्रतिष्ठित अपोलो अस्पताल में कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट बनकर गंभीर हृदय रोगियों का इलाज किया और उनकी एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी जैसी जटिल सर्जरी की, जिसके कारण कथित तौर पर 27 मरीजों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इस पूरे मामले में पुलिस ने अपोलो अस्पताल प्रबंधन को क्लीनचिट दे दी है।

फर्जी नाम और जाली दस्तावेजों के सहारे बना था ‘दिल का डॉक्टर’

यह पूरा मामला बेहद शातिराना धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। आरोपी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जॉन कैम ने खुद को MBBS, MRCP और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट (Interventional Cardiologist) के रूप में स्थापित किया था। वह इन फर्जी उच्च शैक्षणिक डिग्रियों के दम पर अपोलो अस्पताल में कंसलटेंट के तौर पर सेवाएं देता रहा।

दस्तावेजों में हेरफेर: जांच के दौरान जब बिलासपुर पुलिस ने मेडिकल और व्यक्तिगत रिकॉर्ड खंगाले, तो पता चला कि आरोपी ने फर्जी नाम से पहचान पत्र (पहचान संबंधी सरकारी दस्तावेज) और अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र तैयार करवा रखे थे।

इस जालसाजी का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल, उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज, दमोह पुलिस, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और अपोलो अस्पताल प्रबंधन सहित कई संस्थानों से दस्तावेज और साक्ष्य जुटाए। इसके बाद आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और अवैध रूप से डॉक्टर बनकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने का मामला दर्ज किया गया।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत का मामला: परिजनों ने की CBI जांच की मांग

अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी डॉक्टर वर्ष 2006 में वहां कार्यरत था। इसी दौरान छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ल वर्ष 2002 से 2006 के बीच करीब 13 बार अपना इलाज कराने अपोलो अस्पताल पहुंचे थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें 21 जुलाई 2006 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 2 अगस्त 2006 को इस फर्जी डॉक्टर ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की। ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। उन्हें गंभीर हालत में 18 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया, जहां अंततः 20 अगस्त 2006 को उनका निधन हो गया।

19 साल बाद खुला राज, अप्रैल 2025 में दर्ज हुई थी FIR

इस वीआईपी मामले का खुलासा तब हुआ जब अप्रैल 2025 में परिजनों को भनक लगी कि संबंधित डॉक्टर को फर्जी डिग्री के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सच सामने आने के बाद पीड़ित परिवार ने तत्काल पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। अब पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के परिजनों ने इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने और गहनता से परतें खोलने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग तेज कर दी है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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