Katni Nursing Student: कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में नर्सिंग छात्रा सेजल लोनिया की संदिग्ध मौत अब भी रहस्य बनी हुई है। घटना को 18 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस अब तक इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है कि यह मामला आत्महत्या का है या फिर इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी हुई है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच में मिले मेडिकल साक्ष्यों ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों को उलझा दिया है।
24 वर्षीय सेजल लोनिया, जो मूल रूप से शहडोल जिले के धनपुरी नगर की रहने वाली थी, पिछले तीन महीने से कटनी के जीडी मेमोरियल हॉस्पिटल में नर्सिंग का प्रशिक्षण ले रही थी। वह शहर के मदन मोहन चौबे वार्ड स्थित एक किराए के मकान में अकेली रह रही थी।
बंद कमरे में मिला शव, खिड़की से झांकने पर हुआ खुलासा
Katni Nursing Student: घटना 20 जून की सुबह सामने आई। मकान मालकिन मीना यादव के अनुसार, रोज की तरह सुबह पानी भरने के दौरान उन्होंने देखा कि सेजल के कमरे का दरवाजा काफी देर तक बंद है। कई बार आवाज लगाने और दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उन्हें संदेह हुआ।
उन्होंने खिड़की से अंदर झांककर देखा तो सेजल बिस्तर पर अचेत अवस्था में पड़ी हुई थी। उन्होंने खिड़की से पानी के छींटे मारकर उसे जगाने की कोशिश भी की, लेकिन कोई हरकत नहीं हुई। इसके बाद तत्काल रंगनाथ थाना पुलिस को सूचना दी गई।
कमरे से मिले इंजेक्शन और सिरिंज ने बढ़ाया रहस्य
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ा तो सेजल मृत अवस्था में बिस्तर पर मिली। कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे सबूत मिले, जिन्होंने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया।
मौके से एट्राक्यूरियम बेसिलेट (Atracurium Besilate) इंजेक्शन, आर्टासिल इंजेक्शन की खाली शीशियां और इस्तेमाल की गई सिरिंज बरामद हुईं। सभी सामग्री को पुलिस ने जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया।
दोनों हाथों पर मिले इंजेक्शन के निशान
Katni Nursing Student: जांच के दौरान मृतका के दोनों हाथों पर इंजेक्शन लगाने के निशान भी पाए गए। यही तथ्य अब इस मामले की सबसे बड़ी पहेली बन गया है।पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इतने संवेदनशील इंजेक्शन छात्रा तक कैसे पहुंचे और इन्हें किसने लगाया। क्या इंजेक्शन उसने स्वयं लगाए या फिर इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है? यही सवाल जांच का केंद्र बने हुए हैं।
ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल होने वाली दवा
विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. राजीव द्विवेदी के अनुसार, एट्राक्यूरियम बेसिलेट एक नॉन-डिपोलराइजिंग मसल रिलैक्सेंट दवा है, जिसका उपयोग सामान्य परिस्थितियों में नहीं किया जाता।उन्होंने बताया कि यह दवा केवल ऑपरेशन थिएटर (OT) या आईसीयू में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में दी जाती है। इसका उपयोग मरीज की बड़ी सर्जरी के दौरान मांसपेशियों को अस्थायी रूप से शिथिल करने के लिए किया जाता है। गलत तरीके से या बिना चिकित्सकीय निगरानी के इसका उपयोग जानलेवा साबित हो सकता है।
ड्रग सप्लाई चेन की भी जांच
Katni Nursing Student: मामले की निगरानी कर रहे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य ने बताया कि पुलिस हर पहलू पर गंभीरता से जांच कर रही है।उन्होंने कहा कि जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि इतना संवेदनशील इंजेक्शन आखिर छात्रा तक कैसे पहुंचा। इसके लिए अस्पताल के रिकॉर्ड, दवाओं की सप्लाई चेन और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।
FSL और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
पुलिस का कहना है कि मौत के कारणों का अंतिम खुलासा पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही हो सकेगा।फिलहाल यह मामला आत्महत्या, दुर्घटना या किसी साजिश—तीनों संभावनाओं के बीच उलझा हुआ है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर रही।







