Jabalpur Building Collapse: जबलपुर। मध्य प्रदेश की न्यायधानी जबलपुर में मंगलवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। शहर के सबसे पुराने, संकरे और व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों में शामिल बड़ा फुहारा इलाके में स्थित 30 वर्ष से अधिक पुरानी चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह जमींदोज हो गई। हादसे के समय पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
राहत की बात यह रही कि मंगलवार होने के कारण बड़ा फुहारा बाजार बंद था। यदि बाजार खुला होता तो बड़ी संख्या में व्यापारी, कर्मचारी और ग्राहक वहां मौजूद रहते, जिससे जनहानि की आशंका काफी अधिक थी। बाजार बंद रहने के कारण सैकड़ों लोगों की जान बच गई और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
ग्राउंड फ्लोर पर संचालित थी प्रसिद्ध साड़ी दुकान
Jabalpur Building Collapse: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरने से पहले कोई बड़ा संकेत नहीं मिला। कुछ ही क्षणों में पूरी चार मंजिला बिल्डिंग धूल के गुबार के साथ धराशायी हो गई। इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर ‘सोसाइटी साड़ी भंडार’ नाम से प्रसिद्ध कपड़ों की दुकान संचालित होती थी, जो इलाके की जानी-मानी दुकानों में शामिल है।
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जानकारी के अनुसार, इस भवन के मालिक का नाम राजा जैन बताया जा रहा है। हादसे में भवन के सामने खड़ी एक कार मलबे की चपेट में आ गई और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। आसपास मौजूद अन्य दुकानों और संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीम
Jabalpur Building Collapse: घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस, फायर ब्रिगेड की टीम और जिला प्रशासन के अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया और मलबा हटाने का अभियान शुरू किया गया। एहतियात के तौर पर यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि मलबे के नीचे कोई व्यक्ति फंसा न हो।प्रशासन ने आसपास की इमारतों का भी निरीक्षण शुरू कर दिया है ताकि किसी अन्य जर्जर भवन से खतरा होने की स्थिति में समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
कांग्रेस ने नगर निगम पर साधा निशाना
Jabalpur Building Collapse: घटना के बाद स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने मौके पर पहुंचकर नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि शहर में कई जर्जर और खतरनाक इमारतें वर्षों से खड़ी हैं, लेकिन नगर निगम उनकी पहचान कर कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रहा है।
कांग्रेस का कहना है कि यदि बाजार खुला होता तो यह हादसा बड़ी त्रासदी में बदल सकता था। उन्होंने मांग की कि शहर की सभी जर्जर इमारतों का तत्काल सर्वे कराया जाए और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खतरनाक भवनों को या तो खाली कराया जाए या नियमानुसार ध्वस्त किया जाए।
फिर उठे जर्जर भवनों की निगरानी पर सवाल
Jabalpur Building Collapse: इस घटना ने एक बार फिर नगर निगम के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें समय-समय पर शहर के जर्जर भवनों की पहचान और कार्रवाई की बात कही जाती रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने शहर के कई हिस्सों में आज भी ऐसी इमारतें मौजूद हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है। भवन गिरने के कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। साथ ही आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना दोबारा न हो।







