MP Gujarat Agreement: 30 साल पुराने सरदार सरोवर विवाद का हुआ ऐतिहासिक अंत, चार राज्यों में बनी सहमति; मध्य प्रदेश का 7,669 करोड़ का दावा खारिज, गुजरात को मिलेंगे 1,650 करोड़ रुपये

MP Gujarat Agreement: नई दिल्ली/भोपाल। देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजनाओं में शामिल सरदार सरोवर बांध परियोजना से जुड़ा करीब 30 वर्षों से लंबित वित्तीय विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। केंद्र सरकार की पहल पर नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच एक ऐतिहासिक सहमति बनी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और चारों राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। लंबे समय से चले आ रहे वित्तीय मतभेदों को समाप्त करते हुए सभी पक्षों ने नए समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के साथ ही सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े करोड़ों रुपये के वित्तीय दावों और भुगतान को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार ने इसे राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सहकारी संघवाद की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया है।

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क्या था पूरा विवाद?

MP Gujarat Agreement: सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के दौरान डूब क्षेत्र, विस्थापन, पुनर्वास और निर्माण लागत को लेकर चारों राज्यों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए थे। मध्य प्रदेश सरकार का दावा था कि परियोजना के कारण राज्य के बड़े हिस्से में भूमि डूबी, हजारों परिवार प्रभावित हुए और पुनर्वास पर भारी खर्च करना पड़ा। इसी आधार पर मध्य प्रदेश ने गुजरात से 7,669 करोड़ रुपये की मांग की थी।

हालांकि, कई वर्षों तक चली बैठकों, तकनीकी समितियों और कानूनी प्रक्रियाओं के बावजूद इस विवाद का कोई अंतिम समाधान नहीं निकल पाया था। यही वजह थी कि यह मामला लगभग तीन दशकों तक लंबित रहा।

अब किस आधार पर हुआ समझौता?

MP Gujarat Agreement: नई दिल्ली में हुई बैठक में चारों राज्यों ने यह तय किया कि डूब क्षेत्र और पुनर्वास के दावों के बजाय परियोजना के निर्माण के दौरान आई अतिरिक्त लागत को आधार बनाकर वित्तीय समायोजन किया जाएगा। इसी फार्मूले पर सभी राज्यों ने सहमति जताई।

इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश का 7,669 करोड़ रुपये का दावा पूरी तरह खारिज कर दिया गया। इसके स्थान पर अब परियोजना की अतिरिक्त लागत का हिस्सा सभी भागीदार राज्यों को वहन करना होगा।

गुजरात को मिलेगा 1,650 करोड़ रुपये

नए समझौते के अनुसार मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान—तीनों राज्य गुजरात सरकार को 550-550 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे। इस तरह गुजरात को कुल 1,650 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।

इस फैसले के बाद वर्षों से अटका वित्तीय हिसाब-किताब पूरा हो जाएगा और परियोजना से जुड़ी सभी वित्तीय देनदारियों का निपटारा हो सकेगा।

बैठक में रहे ये बड़े नेता मौजूद

MP Gujarat Agreement: समझौते को अंतिम रूप देने के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल मौजूद रहे। बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समझौते के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।बैठक में सभी राज्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि लंबे समय तक विवाद बनाए रखने के बजाय आपसी सहयोग और सहमति से समाधान निकालना सभी के हित में है।

मध्य प्रदेश को क्या हुआ नुकसान?

इस समझौते के बाद मध्य प्रदेश को सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। राज्य द्वारा किया गया 7,669 करोड़ रुपये का दावा पूरी तरह निरस्त हो गया। इतना ही नहीं, अब मध्य प्रदेश को भी गुजरात सरकार को 550 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।हालांकि, सरकार का मानना है कि इस समझौते से भविष्य में किसी प्रकार के वित्तीय विवाद की संभावना समाप्त हो जाएगी और परियोजना से जुड़े मामलों में स्पष्टता बनी रहेगी।

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गुजरात के लिए क्यों है बड़ी उपलब्धि?

इस समझौते के बाद गुजरात को तीनों भागीदार राज्यों से कुल 1,650 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। इससे राज्य को परियोजना की अतिरिक्त निर्माण लागत की भरपाई करने में मदद मिलेगी। साथ ही, वर्षों से लंबित वित्तीय विवाद समाप्त होने से परियोजना के प्रबंधन और भविष्य की योजनाओं को भी गति मिलेगी।

केंद्र सरकार ने बताया ऐतिहासिक फैसला

MP Gujarat Agreement: केंद्र सरकार ने इस समझौते को राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। अधिकारियों के अनुसार, वर्षों पुराने विवाद के समाप्त होने से भविष्य में परियोजनाओं के संचालन, वित्तीय प्रबंधन और अंतरराज्यीय सहयोग को नई मजबूती मिलेगी।

सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े इस ऐतिहासिक समझौते को चारों राज्यों के बीच विश्वास और सहयोग की नई शुरुआत माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाप्त होने से न केवल वित्तीय अनिश्चितता खत्म होगी, बल्कि भविष्य में परियोजना के संचालन और विकास कार्यों में भी तेजी आने की उम्मीद है।

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