Raipur Weekend Getaway: रायपुर: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के वनांचल अपनी प्राचीन संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों और बेमिसाल प्राकृतिक संपदा के लिए पूरे देश में विख्यात हैं। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में कई ऐसे प्राचीन और खूबसूरत मंदिर मौजूद हैं, जो सामान्य दिनों में जितने भव्य दिखते हैं, बारिश के मौसम में उनकी सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। सावन के इस महीने और मानसून की झमाझम फुहारों के बीच ये देवस्थल घने जंगलों, चारों ओर फैली मखमली हरियाली और कल-कल बहते जीवंत झरनों के बीच घिरकर किसी धरती के स्वर्ग जैसे प्रतीत होने लगते हैं। यदि आप भी इस खुशनुमा मौसम में भक्ति के साथ प्रकृति का आनंद लेना चाहते हैं, तो राजधानी रायपुर के नजदीक स्थित ये 5 मंदिर आपके वीकेंड के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं:
1. जतमई और घटारानी मंदिर (गरियाबंद)
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दूरी: रायपुर से लगभग 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थल गड़ियाबंद जिले का प्रमुख आकर्षण है। [1]
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विशेषता: घने और सुरम्य जंगलों के बीच ग्रेनाइट पत्थरों की नक्काशी से निर्मित इस मंदिर के ठीक समीप ही विश्व प्रसिद्ध घटारानी और जतमई झरने मौजूद हैं। मानसून की झमाझम बारिश के बाद जब ये प्राकृतिक झरने पूरी तरह से जीवंत होकर चट्टानों से नीचे गिरते हैं, तो यहाँ का प्राकृतिक दृश्य सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

2. भोरमदेव मंदिर (कबीरधाम)
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दूरी: रायपुर से करीब 135 किलोमीटर दूर (कवर्धा के पास)।
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विशेषता: 11वीं सदी में नागवंशी राजाओं द्वारा निर्मित इस जगप्रसिद्ध शिव मंदिर को अपनी उत्कृष्ट स्थापत्य कला के कारण “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” भी कहा जाता है। [1] बारिश के दिनों में गगनचुंबी मैकल पर्वतमाला की चोटियां बादलों की धुंध से घिर जाती हैं और पास ही स्थित सरोधा जलाशय के आसपास के हरे-भरे अद्भुत नज़ारे इस पावन स्थल को आध्यात्मिक और प्राकृतिक रूप से बेहद आकर्षक बना देते हैं।

3. सिया देवी मंदिर (बालोद)
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दूरी: रायपुर से इसकी दूरी करीब 120 किलोमीटर है (धमतरी और बालोद सरहद के पास)।
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विशेषता: हरी-भरी ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह पावन मंदिर अपने पौराणिक वाल्मीकि झरने के लिए संपूर्ण अंचल में प्रसिद्ध है। बारिश के मौसम में पहाड़ी जल स्रोतों के कारण यह झरना अपने पूरे उफान और वेग पर होता है, जिससे यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक शानदार पिकनिक स्पॉट बन जाता है।
4. चंडी माता मंदिर (महासमुंद)
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दूरी: रायपुर से लगभग 95 किलोमीटर (घंचापली, बागबाहरा के पास)।
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विशेषता: वन्यजीवों और घने प्राकृतिक सौंदर्य से घिरी हुई एक ऊंची पहाड़ी पर माता चंडी का यह दरबार स्थित है। मॉनसून के दौरान यह पूरी पहाड़ी घनी सफेद धुंध और हरी-भरी खूबसूरत वादियों की चादर से ढक जाती है, जिससे यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को एक अलौकिक शांति की अनुभूति होती है।

5. मदकू द्वीप (बिलासपुर)
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दूरी: रायपुर से इसकी दूरी करीब 125 किलोमीटर पड़ती है।
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विशेषता: पवित्र शिवनाथ नदी के बीचों-बीच स्थित यह शांत और मनोरम टापू (द्वीप) अपने प्राचीन कलचुरी कालीन पुरातात्विक मंदिरों और मूर्तियों के लिए इतिहास प्रेमियों के बीच जाना जाता है। बारिश के समय जब शिवनाथ नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो चारों ओर पानी की अथाह जलराशि, फैली हुई घनी हरियाली और टापू का शांत व निशब्द वातावरण इसे ध्यान और आध्यात्मिक साधना के लिए एक अद्भुत और बेजोड़ केंद्र बना देता है।
इन सभी पर्यटन स्थलों पर मानसून के दौरान सुरक्षा और सुचारू विधिक यातायात व्यवस्था के लिए स्थानीय जिला प्रशासनों द्वारा विशेष प्रबंध भी किए गए हैं ताकि पर्यटक बिना किसी असुविधा के इस मानसूनी सैर का आनंद ले सकें।







