Saturday, August 22, 2026
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अमरनाथ में बाबा बर्फानी का प्राकृतिक हिम शिवलिंग 5 दिन में पिघला! क्या पहले जैसे होंगे दर्शन?

Amarnath Ice Shivling: अमरनाथ हिम शिवलिंग को लेकर इस बार यात्रा के शुरुआती दिनों में ही बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग अब लगभग पूरी तरह पिघल चुका है। यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी और केवल पांच दिन के भीतर हिम शिवलिंग का आकार काफी छोटा हो गया। हालांकि यात्रा पहले की तरह जारी है और श्रद्धालु लगातार बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

अमरनाथ हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए पहले चार दिनों में करीब 86 हजार श्रद्धालु गुफा तक पहुंच चुके थे। अधिकारियों के अनुसार पांचवें दिन यह संख्या एक लाख के पार पहुंचने की संभावना है। इस वर्ष यात्रा के लिए लगभग चार लाख लोगों ने पंजीकरण कराया है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना अभी बाकी है।

कुछ दिन पहले 7 फीट ऊंचा था हिम शिवलिंग
अमरनाथ हिम शिवलिंग का आकार मौसम के अनुसार हर साल बदलता है। 23 मई को जारी तस्वीरों में इसकी ऊंचाई करीब सात फीट बताई गई थी। वहीं 29 जून को पहली पूजा के समय भी इसका आकार पांच फीट से अधिक था। अब सामने आई ताजा तस्वीरों में हिम शिवलिंग का अधिकांश हिस्सा पिघला हुआ दिखाई दे रहा है।

प्राकृतिक तरीके से बनता है हिम शिवलिंग
अमरनाथ हिम शिवलिंग किसी इंसान द्वारा बनाया या तराशा नहीं जाता। यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया से तैयार होता है। गुफा की छत से टपकने वाली पानी की बूंदें कम तापमान में जमती हैं और धीरे-धीरे बर्फ का शिवलिंग बनता है। मौसम, तापमान और पानी की उपलब्धता के कारण हर साल इसका आकार अलग-अलग होता है।

क्या यात्रा पर पड़ेगा कोई असर?
अमरनाथ हिम शिवलिंग के पिघलने के बावजूद फिलहाल यात्रा में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। प्रशासन की ओर से यात्रा रोकने या दर्शन बंद करने की कोई घोषणा नहीं हुई है। श्रद्धालु पहले की तरह दोनों मार्गों से गुफा तक पहुंच रहे हैं और दर्शन जारी हैं।
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क्या दोबारा बन सकता है हिम शिवलिंग?
अमरनाथ हिम शिवलिंग दोबारा बनने की संभावना मौसम पर निर्भर करती है। यदि तापमान फिर से शून्य डिग्री या उससे नीचे चला जाए और ताजा बर्फबारी हो, तो बर्फ का नया जमाव हो सकता है। हालांकि सामान्य मौसम में इसकी संभावना कम मानी जाती है।

दो रास्तों से जारी है अमरनाथ यात्रा
अमरनाथ हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालु दो प्रमुख मार्गों का उपयोग कर रहे हैं। पहला पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम मार्ग है, जबकि दूसरा 14 किलोमीटर लंबा बालटाल मार्ग है, जो छोटा जरूर है लेकिन अधिक कठिन माना जाता है। यह यात्रा 28 अगस्त, रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी।

श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह
अमरनाथ हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। यात्रा के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए स्वास्थ्य, सुरक्षा और निर्धारित मार्गों से जुड़ी सभी सावधानियां बरतना जरूरी है।

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