Madhya Pradesh Missile Ecosystem: मध्यप्रदेश मिसाइल इकोसिस्टम के रूप में राज्य को रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मिलने जा रही है। शिवपुरी जिले के पाली गांव में दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा प्राइवेट मिसाइल इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की आधारशिला केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रखेंगे। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से मध्यप्रदेश रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाएगा।
मध्यप्रदेश मिसाइल इकोसिस्टम परियोजना का निर्माण अडाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजी द्वारा किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट करीब 103.18 हेक्टेयर भूमि पर विकसित होगा। कंपनी इस पर लगभग 2500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। सरकार का मानना है कि यह निवेश प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देगा और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करेगा।
10 हजार से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार
मध्यप्रदेश मिसाइल इकोसिस्टम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। इस परियोजना के माध्यम से 10,050 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है। इससे शिवपुरी ही नहीं, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलेगी।विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना शुरू होने के बाद आसपास के क्षेत्रों में छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
एक ही परिसर में बनेगी पूरी मिसाइल सप्लाई चेन
मध्यप्रदेश मिसाइल इकोसिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि मिसाइल निर्माण से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन एक ही परिसर में विकसित की जाएगी। यहां सिंगल, डबल और ट्रिपल बेस प्रोपेलेंट तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा वारहेड में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटक और अन्य जरूरी रक्षा सामग्री का भी निर्माण होगा।यहीं पर मिशन रेडी मिसाइल के लिए जरूरी सभी प्रमुख कंपोनेंट तैयार किए जाएंगे, जिससे उत्पादन प्रक्रिया और अधिक तेज और प्रभावी होगी।
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चार चरणों में पूरा होगा मेगा प्रोजेक्ट
मध्यप्रदेश मिसाइल इकोसिस्टम को चार चरणों में विकसित किया जाएगा।
- पहले चरण में इंटीग्रेटेड कैंपस के भीतर प्रोपेलेंट, टीएनटी (TNT) और अन्य रक्षा सामग्री तैयार की जाएगी।
- दूसरे चरण में इन्हीं उत्पादों का उपयोग कर मिशन रेडी मिसाइल का निर्माण किया जाएगा।
- तीसरे चरण में आधुनिक ऑटोमेटेड तकनीक की मदद से एक साथ कई मिसाइल कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
- अंतिम चरण में यहां तैयार मिसाइलों और अन्य रक्षा सामग्री की आपूर्ति भारतीय सशस्त्र बलों को की जाएगी।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र को मिलेगी नई पहचान
मध्यप्रदेश मिसाइल इकोसिस्टम के शुरू होने से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र देश के प्रमुख रक्षा उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ने के साथ-साथ नई तकनीक, कुशल मानव संसाधन और औद्योगिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।राज्य सरकार का लक्ष्य है कि मध्यप्रदेश को रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाए और यह परियोजना उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
रक्षा क्षेत्र में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग
मध्यप्रदेश मिसाइल इकोसिस्टम केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास और देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है। इस परियोजना से रोजगार, निवेश और तकनीकी विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को भी मजबूती मिलेगी और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति मिलने की उम्मीद है।







