Fraud Investigation: जबलपुर। संस्कारधानी में अनुकंपा नियुक्ति और पैसों के लेनदेन को लेकर दो पक्षों के बीच उपजा विवाद अब पूरी तरह गरमा गया है। मामले में खुद पर लगे आरोपों की सफाई देने के लिए राघवेंद्र तिवारी शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचे। उन्होंने आला अधिकारियों को एक लिखित आवेदन सौंपकर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया है। तिवारी का कहना है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
सीओडी विभाग में नौकरी के नाम पर रकम लेने का आरोप गौरतलब है कि इस मामले में कुछ दिन पूर्व निशांत लोधी और रूपा अरोरा नामक शिकायतकर्ताओं ने राघवेंद्र तिवारी के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि राघवेंद्र ने सीओडी (सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो) विभाग में अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के नाम पर उनसे 1 लाख रुपये से अधिक की राशि ली थी, लेकिन न तो काम कराया और न ही पैसे वापस किए।
हाईकोर्ट का निर्णय और जन्मतिथि का पेच मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडिशनल एसपी) सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि राघवेंद्र तिवारी ने अपने पक्ष में एक वकील के माध्यम से उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) का निर्णय और फीस संबंधी अहम दस्तावेज पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। दूसरी ओर, इस विवाद में रूपा अरोरा से जुड़ा एक और नया पहलू सामने आया है। राघवेंद्र का दावा है कि रूपा अपने बच्चे की जन्मतिथि बदलवाना चाहती थीं। शुरुआत में कानूनी मदद करने के बाद जब वकील ने स्पष्ट किया कि वास्तविक जन्मतिथि को बदला नहीं जा सकता, तो इसी बात से नाराज होकर उन्होंने यह झूठी शिकायत दर्ज करवा दी।
राघवेंद्र तिवारी ने अपने पक्ष में कुछ कानूनी दस्तावेज और माननीय उच्च न्यायालय का निर्णय प्रस्तुत किया है। मामले की गंभीरता और दोनों पक्षों के दावों को देखते हुए आवेदनों को जांच के लिए टीआई बेलबाग के पास भेज दिया गया है। साक्ष्य और जमीनी तथ्यों को एकत्रित कर निष्पक्ष जांच की जा रही है। यदि किसी भी पक्ष द्वारा झूठे साक्ष्य गढ़ने या भ्रामक जानकारी देने की बात सिद्ध होती है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। — सूर्यकांत शर्मा, एडिशनल एसपी, जबलपुर









