Chhattisgarh Liquor Scam : छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड IAS और पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। यह फैसला सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनाया।EOW के मुताबिक, छत्तीसगढ़ शराब घोटाला में निरंजन दास सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे। उन पर आरोप है कि वे यह तय करते थे कि किस जिले में कौन अधिकारी रहेगा, कौन सा ब्रांड बिकेगा और शराब सप्लाई का नेटवर्क कैसे चलेगा।
जांच एजेंसियों के अनुसार छत्तीसगढ़ शराब घोटाला में निरंजन दास को 30 करोड़ रुपए से ज्यादा का कमीशन मिला था।EOW का दावा है कि आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी के साथ मिलकर उन्होंने करीब तीन साल तक पूरे सिस्टम को संचालित किया। जांच में यह भी सामने आया कि नीति निर्माण से लेकर शराब वितरण तक कई फैसलों में उनकी अहम भूमिका थी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई
सुनवाई के दौरान कोर्ट में बताया गया कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाला में निरंजन दास ने आबकारी नीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी, जिससे कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया गया।हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले के कई सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लगेगा। इसी आधार पर कोर्ट ने उन्हें भी राहत दी।कोर्ट ने शर्त रखी है कि निरंजन दास फिलहाल छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे और केवल जांच या कोर्ट में पेशी के लिए ही राज्य में आ सकेंगे।
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अनवर ढेबर की जमानत याचिका पर भी सुनवाई
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला में कारोबारी अनवर ढेबर ने भी सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है।सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से 3 जून तक जवाब मांगा है। इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका था।
अब तक 10 आरोपी पा चुके हैं जमानत
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला में अब तक कई बड़े अफसरों और नेताओं को सुप्रीम Court से राहत मिल चुकी है।
जमानत पाने वालों में शामिल हैं:
- अनिल टुटेजा
- रानू साहू
- समीर विश्नोई
- सौम्या चौरसिया
- एपी त्रिपाठी
- कवासी लखमा
- सूर्यकांत तिवारी
- केके श्रीवास्तव
- निरंजन दास
इन सभी को राज्य से बाहर रहने जैसी शर्तों के साथ जमानत दी गई है।
क्या है 3200 करोड़ का शराब घोटाला
ED के मुताबिक छत्तीसगढ़ शराब घोटाला करीब 3200 करोड़ रुपए का है।जांच एजेंसियों का आरोप है कि तत्कालीन सरकार के दौरान अफसरों और कारोबारियों के सिंडिकेट ने मिलकर शराब वितरण में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की।
नकली होलोग्राम से सरकारी दुकानों तक पहुंची शराब
जांच में सामने आया कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाला के दौरान नकली होलोग्राम लगाकर शराब सरकारी दुकानों में बेची गई।डिस्टलरी मालिकों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपए तक कमीशन लिया जाता था। इसके अलावा शराब सप्लाई जोन तय करने के नाम पर भी करोड़ों रुपए वसूले गए।EOW का दावा है कि करीब 40 लाख पेटी शराब अवैध तरीके से बेची गई।
जांच में सामने आए बड़े खुलासे
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला की जांच में यह भी सामने आया कि सिंडिकेट ने 15 जिलों को शराब बिक्री के लिए शॉर्टलिस्ट किया था।सरकारी रिकॉर्ड से बाहर शराब बेचने, ओवर बिलिंग और सप्लाई एरिया बदलने जैसे कई तरीकों से करोड़ों रुपए की अवैध कमाई की गई।अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सभी की नजर टिकी हुई है।









